आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इजराइल- हमास जंग के 11वें दिन 17 सितंबर को देर रात गाजा शहर के अहली अरब अस्पताल पर जोरदार हमला हुआ। इसमें 500 लोगों की मौत हो गई। हमले के तुरंत बाद हमास ने बयान जारी कर बताया कि इस अटैक के पीछे इजराइल का हाथ है।
उन्होंने अस्पताल पर हमला करने के लिए स्मार्ट बम का इस्तेमाल किया। इजराइल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर हमास पर ही आरोप लगा दिए। इजराइल ने कहा कि हमास ने गलती से अपने ही रॉकेट को अस्पताल पर दाग दिया।
स्टोरी में जानेंगे की स्मार्ट बम क्या होते हैं, जंग में इन्हें कब-कब इस्तेमाल किया गया और ये कितने घातक होते हैं…
क्या इजराइल के पास स्मार्ट बम हैं?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक 7 अक्टूबर को हमास से जंग छिड़ने के बाद अमेरिकी कंपनी बोइंग ने इजराइल को 1000 छोटे स्मार्ट बमों की डिलिवेरी की है। इसके अलावा इजराइल के पास खुद से बनाए स्पाइस बम हैं, ये भी स्मार्ट बम की कैटेगरी में आते हैं।
इसका इस्तेमाल भारतीय वायु सेना भी करती है। स्पाइस बम इजराइल की फर्म राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड ने बनाया है। इन 2000-पाउंड के स्मार्ट बमों को गिराने में मिराज 2000 का इस्तेमाल किया जाता है। स्पाइस 2000 की ग्लाइडिंग रेंज (मार करने की क्षमता) 60 किलोमीटर तक है।
वहीं, यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजराइल गाजा में पुराने अनगाइडेड बम दाग रहा है। जिनका टारगेट सटीक नहीं होता है। इसकी वजह से ये फायर होने के बाद कहीं पर भी गिरकर फट जाते हैं। इनमें कई तो 1950 के हैं। जैसे M117, जो कोरियाई युद्द में इस्तेमाल हुए थे। ऐसे में हो सकता है कि इजराइल की तरफ से फायर किया गया कोई अनगाइडेड बम ही गाजा शहर के अस्पताल पर गिरा हो।
स्मार्ट बम क्या होते हैं?
स्मार्ट बम को गाइडेड बम भी कहा जाता है। ये बम बड़ी सटीकता से दुश्मन के ठिकानों पर हमला करते हैं। ये हवा से जमीन पर गिरने वाला बम होता है। इसका मकसद एक खास टारगेट पर अटैक कर उसे नष्ट करना है, ताकि आसपास के इलाकों को नुकसान न पहुंचे।
स्मार्ट बम को अमेरिका में बड़े पैमाने पर बनाया जाता है। इन्हें रेथियॉन टेक्नोलॉजीज कॉर्पोरेशन और बोइंग इंटीग्रेटेड डिफेंस सिस्टम्स नाम की कंपनी बनाती हैं।
पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध में इस्तेमाल हुआ
अमेरिकी वायु सेना ने पहली बार इस बम का इस्तेमाल सेकेंड वर्ल्ड वॉर में किया था। जुलाई 1944 में अमेरिकी वायु सेना ने VB-1 AZON बमों का इस्तेमाल कर पश्चिमी यूरोप और बर्मा (म्यांमार) में कई मिलिट्री ऑपरेशन चलाए थे।
ये 450 किलोग्राम के फ्री फॉल बम थे, जिसके पिछले हिस्से में अंगूठी जितना रेडियो कंट्रोल स्टेबलाइजर्स लगा था। इस बम को जाइरोस्कोपिक ऑटोपायलट के साथ भी फिट किया गया था, ताकि ये टारगेट पर अटैक करते वक्त स्थिर रहें और रास्ते से भटके नहीं।
बी-24 लिबरेटर विमान से लॉन्च होते थे स्मार्ट बम
VB-1 AZON शुरुआती स्मार्ट बम था। ऐसे में इसमें कई खामियां भी थी। इसे सटीकता से लॉन्च करने के लिए ऊंचाई, हवा की रफ्तार, वायु दाब जैसी बातों का ध्यान रखना होता था। उस वक्त इस बम के पास लॉन्च होने के बाद अपना रास्ता बदलने की क्षमता नहीं थी। इसे बी-24 लिबरेटर विमान में सवार ऑपरेटर लॉन्च करता था।
ये बम साइट नाम की डिवाइस की मदद से लक्ष्य पर निशाना साधता था। रात में इस बम को ट्रैक करने के लिए इसके ऊपर टॉर्च लगाई जाती थी। इसकी फ्लैशलाइट को देखकर ऑपरेटर बम की दिशा और स्पीड का पता लगाता था। जैसे ही द्वितीय विश्व युद्ध खत्म हुआ, अमेरिका ने VB-1 AZON को हटाकर उसकी जगह RAZON बम को तैनात कर दिया।