आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हमास की बेहद क्रूर मानी जाने वाली मिलिट्री विंग अल-कासिम ब्रिगेड ने इजराइल पर हमला किया। इसका चीफ मोहम्मद देइफ है। यही 7 अक्टूबर को इजराइल पर हुए हमले का मास्टरमाइंड है। देइफ सालों से इजराइल की “मोस्ट वांटेड” लिस्ट में टॉप पर है। इजराइल ने 2021 में उसे 7 बार मारने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा।
अल कासिम ब्रिगेड को 1991 में बनाया गया। इसका नाम फिलिस्तीनी मुजाहिदीन इज्ज अल दीन अल कासिम के नाम पर रखा गया है।
इधर, अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA का कहना है कि अल-कासिम के लड़ाके हथियार बनाना जानते हैं। वो हमले में सबसे ज्यादा रॉकेट और ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं। इन लड़ाकों को रॉकेट, IED बनाने में महारत हासिल है। इजराइली डिफेंस फोर्स (IDF) के मुताबिक, अल-कासिम ब्रिगेड के लड़ाके पाइप से रॉकेट बना लेते हैं। IDF ने इससे जुड़ा एक वीडियो भी शेयर किया था।
सबसे पहले ग्राफिक्स के जरिए हमास को जानिए…
2012 में मारा गया था अल-कासिम चीफ जबारी
1994 से 2000 तक अल कासिम ब्रिगेड ने इजराइलियों के खिलाफ कई बड़े हमलों को अंजाम देने की जिम्मेदारी ली। वहीं, 2005 में इजराइली सेना के गाजा पट्टी से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के बाद से अब तक इजराइल ने गाजा में 6 बड़े हमले किए। 2012 में ऐसे ही एक बड़े हमले में अल-कासिम चीफ अहमद जबारी मारा गया था।
अल कासिम ब्रिगेड पर इन देशों में प्रतिबंध
अल कासिम ब्रिगेड को यूरोपीय यूनियन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मिस्र और यूनाइटेड किंगडम ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है। वहीं, अमेरिका और कनाडा ने हमास को ही आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
रिफ्यूजी कैंप में जन्मा इजराइल पर हमले का मास्टरमाइंड मोहम्मद देइफ
मोहम्मद देइफ 1965 में गाजा के खान यूनिस कैंप (रिफ्यूजी कैंप) में पैदा हुआ था। उस समय गाजा पर इजिप्ट का कब्जा था। 1950 में इजराइल में हथियार लेकर घुसपैठ करने वालों में उसका पिता भी शामिल था।
बचपन से ही उसने अपने रिश्तेदारों को फिलिस्तीन की लड़ाई लड़ते हुए देखा था। देइफ ने गाजा की इस्लामिक यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। 20 साल की उम्र के बाद देइफ की कोई तस्वीर सामने नहीं आई है।
हमास की स्थापना 80 के दशक के अंत में हुई। तब देइफ की उम्र करीब 20 साल थी। ये वो समय था जब वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी पर इजराइल के कब्जे के खिलाफ पहले फिलिस्तीनी इंतिफादा या विद्रोह की शुरुआत हुई थी। इस दौरान देइफ को आत्मघाती बम विस्फोटों में दर्जनों लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।
इसके बाद 1993 में इजराइल-फिलिस्तीन से हजारों मील दूर अमेरिका में एक समझौता हुआ। इसे दुनिया ओस्लो समझौते के नाम से जानती है। ये शांति समझौता इजराइल और फिलिस्तीनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत 10 सितंबर, 1993 को PLO ने इजराइल को मान्यता दे दी। बदले में इजराइल ने भी बड़ा फैसला लिया।
उसने PLO को फिलिस्तीन का आधिकारिक प्रतिनिधि माना, लेकिन हमास को ये बात रास नहीं आई। उसका कहना था कि फिलिस्तीन को वो सारी जमीन वापस की जानी चाहिए जो उसके पास 1948 के अरब-इजराइल युद्ध के पहले तक थी। ओस्लो समझौते के खिलाफ 1996 में इजराइल में एक अटैक हुआ। इसमें 50 से ज्यादा लोग मारे गए थे। इसका आरोप भी देइफ पर लगा।