आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि भारत के फैसले से दोनों देशों में रह रहे लाखों लोगों का जीवन कठिन हो जाएगा। दरअसल, कनाडा की विदेश मंत्री मेलेनी जोली ने पुष्टि की थी कि 41 कनाडाई डिप्लोमैट्स को भारत से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा था कि भारत ने इसके लिए 20 अक्टूबर की डेडलाइन दी थी, जिसके बाद कनाडा को ये कदम उठाना पड़ा।

शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान PM ट्रूडो ने कहा- भारत कूटनीति के मूल सिद्धांत का उल्लंघन करके लाखों लोगों का जीवन मुश्किल में डाल रहा है। मैं उन कनाडाई लोगों के लिए सबसे ज्यादा चिंतित हूं, जिनकी जड़ें भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़ी हैं। ट्रूडो ने कहा कि भारत से कुछ कनाडाई डिप्लोमैट्स को निकाले जाने से ट्रैवल और ट्रेड जैसे मामलों में दिक्कतें आएंगी।

ट्रूडो बोले- कनाडा में मौजूद भारतीय स्टूडेंस को भी दिक्कतें होंगी

ट्रूडो ने कहा कि इससे कनाडा में पढ़ रहे भारतीयों को भी परेशानी होगी। इसके बाद अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा- हम भारत से कनाडाई डिप्लोमैट्स के जाने से चिंतित हैं। दो देशों के बीच मसले सुलझाने के लिए डिप्लोमैट्स का होना बेहद जरूरी है।

अमेरिका ने कहा- हमने भारत से कनाडा के डिप्लोमैट्स को न निकालने की अपील की थी। साथ ही उनसे निज्जर की हत्या की जांच में कनाडा का सहयोग करने को भी कहा था। हम उम्मीद करते हैं कि भारत 1961 के विएना कन्वेंशन का पालन करेगा, जिसमें डिप्लोमैट्स के विशेषाधिकार और इम्यूनिटीज के बारे में बताया गया है।

ब्रिटेन ने कहा- हम भारत के फैसले से सहमत नहीं

दूसरी तरफ ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का भी इस मामले में बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि हम भारत से कनाडाई डिप्लोमैट्स को हटाए जाने के फैसले से सहमत नहीं हैं। राजनयिकों की सुरक्षा के लिए उन्हें दिए जाने वाले विशेषाधिकारों और इम्यूनिटी को एकतरफा हटाना विएना कन्वेंशन के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

गुरुवार को कनाडा की विदेश मंत्री मेलेनी जोली ने घोषणा की थी कि भारत की फैसले के बदले कनाडा कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा क्योंकि वो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना चाहता है। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था- हमने किसी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं किया है और न ही इसे इस तरह से किया जाना चाहिए।

विदेश मंत्रालय बोला- हमने कानून का उल्लंघन नहीं किया

भारत चाहता है कि नई दिल्ली और ओटावा के बीच डिप्लोमैटिक प्रजेंस एक जैसी रहे। हमारे देश में कनाडाई डिप्लोमैट्स ज्यादा था और वो लगातार अंदरूनी मामलों में दखल दे रहे थे। यही वजह है कि हमने राजनयिक बराबरी पर जोर दिया।

दरअसल, भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि कनाडा से उनके डिप्लोमैट्स हटाने के लिए कहा गया है, ताकि दोनों देशों में बराबर राजनयिक हों। भारत में मौजूद कनाडा के एक्स्ट्रा डिप्लोमैट्स हमारे आंतरिक मामलों में दखल देते हैं।

भारत ने कनाडा से 41 डिप्लोमैट्स हटाने को कहा था

फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि भारत ने कनाडा से उनके 41 डिप्लोमैट्स को वापस बुलाने को कहा है। खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या पर जारी तनाव के बीच ये फैसला लिया गया।

रिपोर्ट में ये भी बताया गया था कि डेडलाइन के बाद इन 41 में से जो डिप्लोमैट भारत में रह जाएंगे, उनको मिलने वाली छूट और दूसरे फायदे (डिप्लोमैटिक इम्यूनिटी) बंद कर दिए जाएंगे। कनाडा के भारत में करीब 62 डिप्लोमैट्स थे।