सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : जमीन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड के पूर्व CM हेमंत सोरेन को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। उनकी पत्नी कल्पना सोरेन के नाम पर भाभी और भाई के विरोध के बाद सोरेन परिवार के वफादार चंपई सोरेन को महागठबंधन के विधायकों ने अपना नेता चुना है। हेमंत सोरेन की जगह अब चंपई झारखंड के नए चीफ मिनिस्टर होंगे।
झारखंड टाइगर के नाम से मशहूर चंपई सोरेन को शिबू सोरेन का हनुमान कहा जाता है। पैरों में चप्पल, ढीली शर्ट-पैंट और सिर के बालों पर फैली सफेदी चंपई सोरेन की पहचान है। वे बेहद सादगी से जीवन जीते हैं।
सरायकेला से इन्होंने 6 बार विधानसभा का चुनाव जीता है। 1991 से 2019 के बीच ये केवल एक बार साल 2000 में चुनाव हारे हैं। 2005 के बाद से ये लगातार सरायकेला से विधानसभा का चुनाव जीतते आ रहे हैं। हेमंत सोरेन जब पहली बार CM बने थे, तब इन्हें खाद्य आपूर्ति और साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर बनाया गया था।
हेमंत सोरेन करते हैं सम्मान, सार्वजनिक मंच पर छूते हैं पैर
पार्टी में चंपई सोरेन के कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बार सार्वजनिक मंच पर हेमंत सोरेन इनके पैर छूते दिखाई दिए हैं। मंगलवार को CM हाउस में विधायक दल की बैठक में जब पहली बार हेमंत सोरेन की पत्नी भी बैठक में शामिल हुईं तो उन्होंने सबसे पहले चंपई सोरेन का पैर छूकर आशीर्वाद लिया था, इसके बाद विधायकों के साथ बैठीं।
वफादारी का इनाम, 2008 में भी CM के लिए उछला था नाम
पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहते हैं कि चंपई सोरेन झारखंड आंदोलन के वक्त से ही शिबू सोरेन से जुड़े हुए हैं। इनकी गिनती न केवल सोरेन परिवार के विश्वस्त नेता के रूप में होती है, बल्कि ये पूरी तरह समर्पित कार्यकर्ता भी कहे जाते हैं। चंपई को CM बनाना इसी वफादारी का इनाम माना जा रहा है। इससे पहले 2008 में जब CM रहते शिबू सोरेन तमाड़ विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे, तब भी चंपई का नाम CM पद के लिए उछला था। हालांकि तब ये संभव नहीं हो सका था।
चंपई को आगे कर हेमंत ने पार्टी के साथ परिवार को भी साधा
वरिष्ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह कहते हैं कि चंपई सोरेन को CM बनाना हेमंत सोरेन का एक और मास्टरस्ट्रोक है। इनके नाम पर किसी को ऐतराज नहीं होगा। इस एक नाम के साथ हेमंत सोरेन पार्टी और परिवार दोनों को साधने के साथ सरकार बचाने में भी कामयाब हो जाएंगे।
चूंकि पार्टी के सीनियर लीडर को सरकार की कमान दी गई है इसलिए पार्टी के भीतर नाराज चल रहे नेताओं के पास भी विरोध का कोई विकल्प नहीं बचेगा। परिवार की नाराजगी भी इस बात से दूर हो जाएगी कि हेमंत सोरेन ने पत्नी को CM नहीं बनाया।