आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इजराइल में 7 अक्टूबर को जो भी हुआ वो एक आतंकवादी गतिविधि है, लेकिन फिलिस्तीन का भी एक ऐसा मुद्दा है, जिसका हल निकालना बेहद जरूरी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को इटली में जॉइंट सेक्रेटरी सेशन के दौरान ये बात कही।

इजराइल-हमास जंग पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा- 7 अक्टूबर के बाद भी लगातार आतंकी हमले हुए। इसकी वजह से पूरा क्षेत्र कठिन दौर से गुजर रहा है। आतंकवाद को सहन नहीं किया जा सकता और हम सभी को इसके खिलाफ खड़े होने की जरूरत है। अभी जो हालात हैं वो वहां की नई सच्चाई नहीं हो सकती है। इसके लिए सहयोग और स्थिरता की जरूरत है।

विदेश मंत्री ने कहा- हमें समस्याओं के बीच में बैलेंस ढूंढने की जरूरत है। फिलिस्तीन के लोगों के लिए इस समस्या का हल निकालना जरूरी है। हमारा मानना है कि इसके लिए टू-स्टेट सॉल्यूशन ही समाधान है। अगर हमें किसी मसले को सुलझाना है तो उसे बातचीत और समझौते से ही किया जा सकता है। जंग और आतंकवाद से कुछ नहीं मिल सकता।

जयशंकर बोले- मानवीय कानूनों का पालन करना बेहद जरूरी

जयशंकर ने आगे कहा-अभी के हालातों को देखते हुए हमारा मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने मानवीय कानूनों का पालन करना जरूरी है। किसी भी कठिन स्थिति में संतुलन नहीं खोया जा सकता। उन्होंने कहा- आने वाला समय बहुत कठिन होने वाला है और इसके कई कारण हैं।

विदेश मंत्री ने बताया- अगर पिछले 5 सालों पर नजर डाली जाए तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और समाज पर इसका असर दिखने लगा है। कोविड बहुत दर्दनाक दौर था। अब भी कई देश ऐसे हैं, जो इससे उबर नहीं पाए हैं। दुनिया में बहुत से देश आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कर्ज एक बहुत बड़ी समस्या है और इन सबसे ऊपर यूक्रेन जंग का दुनिया के हर कोने पर असर हुआ है।

PM मोदी ने कहा था- हम हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ

इजराइल-हमास के बीच 7 अक्टूबर को जंग की शुरुआत से भारत ने अपने रुख को साफ रखा है। PM मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से फोन कॉल के बाद कहा था- भारत के लोग इस मुश्किल घड़ी में इजराइल के साथ हैं। हम हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ हैं।

वहीं 7 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था- भारत हमेशा से सीधी बातचीत और समझौते के जरिए बने एक स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य के समर्थन में रहा है। हम अभी भी इसी के पक्ष में हैं। इसके अलावा UN जनरल असेंबली में भी भारत ने जॉर्डन के सीजफायर से जुड़े प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं की थी, क्योंकि इसमें हमास हमले के बारे कुछ नहीं कहा गया था।

एक्सपर्ट बोले- भारत का इजराइल को सशर्त समर्थन

हालांकि, भारत ने उस प्रस्ताव का समर्थन किया था जिसमें कनाडा ने पुराने रिजॉल्यूशन में हमास की निंदा का हिस्सा जोड़ा था। UN में प्रस्ताव पर भारत के वोटिंग न करने पर JNU के प्रोफेसर डॉ राजन कुमार ने बताया- हम इजराइल को ब्लाइंडली सपोर्ट नहीं कर सकते। हमारा इजराइल को सशर्त समर्थन है। हम इसके समर्थन में भी नहीं हैं कि इजराइल गाजा के लोगों को मारे। यही कारण है कि हमने वहां के लिए राहत सामग्री भेजी है।

डॉ राजन ने बताया- भारत हमेशा से अलग फिलिस्तीन देश के पक्ष में रहे हैं। भारत इजराइल और उसके साथी देशों को नाराज नहीं करना चाहता है, लेकिन हमारा पक्ष जस्टिफाइड है। भारत आजादी के लिए उठाए गए हमास के हिंसक कदम का समर्थन नहीं करता।