सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क– इंटीग्रेटेड ट्रेड- न्यूज़ भोपाल: भारत की फार्मा कंपनियों की खांसी की दवाईयों पर एक बड़ा सवालिया निशान लग गया है। सरकारी क्वालिटी टेस्ट में 100 से ज्यादा कफ सिरप फेल हो गई हैं। गांबिया, उज्बेकिस्तान और कैमरून में बच्चों की मौत का कारण बनी इन कफ सिरप में पाया जाने वाला जहर, डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकोल (EG), अब भारत में बनने वाली सिरप में भी पाया गया है।
फार्मा इंडस्ट्री पर गहराया संकट
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) की रिपोर्ट के अनुसार, 100 कफ सिरपों को “नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी” की श्रेणी में रखा गया है। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि DEG/EG की उपस्थिति, माइक्रोबायोलॉजिकल ग्रोथ और पीएच वॉल्यूम के आधार पर इन सिरपों को एनएसक्यू की श्रेणी में रखा गया है।
7,087 में से 353 बैच असफल
7,087 दवाओं के बैच की जांच में 353 को एनएसक्यू पाया गया, जिसमें से 9 सैंपल में DEG और EG की मात्रा पाई गई। इन टॉक्सिन की उपस्थिति के अलावा असुरक्षित सप्लाई चेन और प्रोपिलीन ग्लाइकोल बल्क टेस्टिंग में फेल होने के कारण भी इन सिरपों को खतरनाक घोषित किया गया है।
बच्चों की मौत का कारण
गांबिया में बच्चों की किडनी फेल होने और 70 बच्चों की मौत के बाद WHO ने अक्टूबर 2022 में भारत की कफ सिरप पर सवाल उठाए थे। इसके बाद, राज्य के स्टेट ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट की मदद से देशभर में कफ सिरप बनाने वाली यूनिट्स की जांच की जा रही है। कंपनियों को प्रोपिलीन ग्लाइकोल के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं।
निर्यात पर सख्ती
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स से एक्सपोर्ट के लिए बनाई जा रही कफ सिरप की गंभीरता से जांच करने का निर्देश दिया है। डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेड ट्रेड ने भी कफ सिरप निर्यातकों को दवाई विदेश भेजने से पहले सरकारी लैब में टेस्टिंग करवाने के निर्देश दिए हैं।
इस घटनाक्रम ने भारत की फार्मा इंडस्ट्री को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं। अब सभी की निगाहें सरकारी और प्राइवेट लैब्स में जारी जांच पर टिकी हैं, जो इन खतरनाक दवाईयों की सच्चाई को उजागर करेंगी।