आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इजराइल और हमास की जंग जारी है। शुरुआत 7 अक्टूबर को हमास के इजराइल पर हमले से हुई। रॉकेट और हमास आतंकियों के हमले में 1400 इजराइली मारे गए। बच्चे और महिलाओं को बेरहमी से कत्ल किया गया। 234 बंधक अब भी हमास के कब्जे में हैं।

इस जंग की कई कहानियां सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक दास्तां इजराइली एयरफोर्स की महिला इंजीनियर मेजर A की भी है। उनके मंगेतर फाइटर पायलट (कैप्टन R) हैं। 7 अक्टूबर को उनके साथ क्या हुआ था। यह कहानी उन्हीं की जुबानी, जो उन्होंने इजराइली अखबार ‘हेयोम’ को सुनाई।

इनके कोड नेम इसलिए दिए गए हैं, क्योंकि इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) अपने एक्टिव और रिजर्व सैनिकों और ग्राउंड ऑपरेशन में शामिल अफसरों के नाम सार्वजनिक नहीं करते।

मैरिज से पहले का फंक्शन चल रहा था

मेजर A रिजर्व कॉम्बैट यूनिट से ताल्लुक रखती हैं। उनका घर रेमत डेविड एयरबेस के करीब है। मेजर A कहती हैं- 6 अक्टूबर को मैं शादी के पहले होने वाले फैमिली फंक्शन में थी। यह खत्म हुआ तो मैंने मंगेतर के साथ वेडिंग डेस्टिनेशन बुक किया। शादी 6 महीने बाद होनी है। 7 अक्टूबर को शादी की तैयारियां और स्टडी सब पीछे छूट गए।

रोज की तरह यूनिवर्सिटी जाने की तैयारी कर रही थी। लंबे बाल बांधे। मंगेतर साथ जाने वाले थे। अचानक घर से चंद मीटर दूरी पर रॉकेट गिरा। हम दोनों भागे और करीब के एक बम शेल्टर में छिप गए। चंद मिनट बाद पता लगा कि हमास ने कितना बड़ा हमला किया है। हम दोनों ही रेमत डेविस की स्क्वॉड्रन नंबर 105 में हैं। वो पायलट और मैं कॉम्बैट नेविगेटर हूं। वो रेगुलर फाइटर पायलट और मैं रिजर्व फाइटर नेविगेटर हूं।

बहरहाल, टीवी से पता चला कि हमास ने इजराइल के खिलाफ जंग शुरू कर दी है। हम फौरन अपने बेस की तरफ भागे। चंद मिनट बाद मैं F-16 फाइटर जेट में थी। पहले इसके व्हील चेक किए। फिर मिसाइल और तमाम टेक्निकल कनेक्शन। फिर पायलट की पिछली सीट पर बैठ गई।

परिवार को कुछ पता ही नहीं था

मेजर A कहती हैं- यूनिट की तरफ से काॅल आने के पहले मैं एयरबेस पर थी। फैमिली को कुछ पता ही नहीं था। अब लगता है कि जंग में हमने कुछ हफ्ते नहीं, बल्कि कई साल गुजार दिए। पूरी जिंदगी ही बदल गई है। जरा सोचिए, मैं शादी की तैयारियों में जुटी थी, अब गाजा के ऊपर उड़ान भर रही हूं। हमास के टारगेट्स तबाह कर रही हूं। 7 अक्टूबर के बाद कितनी बार फाइटर जेट में उड़ान भरी, याद ही नहीं है। ज्यादातर हमले रात में किए।

अगर कुछ याद है तो हमास के आतंकी ठिकाने और उसके आतंकी सरगना। 7 अक्टूबर को हमास ने जो वहशियाना जुर्म किया, उसका दर्द महसूस कर सकती हूं। अब न शादी याद है और न स्टडी। ये दर्द मुझे ताकत दे रहा है।