आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ‘ये पहली बार है कि फिलिस्तीन ने ऐसा अटैक किया है। इससे पहले वे मिसाइल दागते थे, बंदी बनाते, कैजुएलिटी करते और भाग जाते थे। इस बार आसमान, पानी और जमीन तीनों से हमला बोला। पैराग्लाइडर्स रडार की पकड़ से बाहर होते हैं, इसलिए उससे आए। बाइक और नावों से आकर इजराइल के छोटे शहरों पर कब्जा किया। म्यूजिक फेस्ट में आम लोगों की हत्या की, अगवा किया। इजराइल में ऐसे हमले की उम्मीद किसी को नहीं थी।’
इजराइल पर हमास के हमले का तरीका देखकर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ जितना हैरान हैं, उतना ही बाकी दुनिया भी है। इजराइल के सबसे करीबी दोस्त अमेरिका, दुनिया की बेस्ट इंटेलिजेंस एजेंसियों में शामिल मोसाद और इजराइली सेना को पता ही नहीं चला कि इतना बड़ा हमला होने वाला है। सभी ने माना कि हमास ने बहुत तैयारी के साथ हमला किया है।
7 अक्टूबर को हमास ने इजराइल पर 20 मिनट में 5 हजार रॉकेट दागे थे। इसके बाद शुरू हुई जंग में 1600 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। हमास के कामयाब हमले और मोसाद की नाकामी में भारत के लिए क्या सबक छिपे हैं और भारत को ऐसे हमलों से निपटने के लिए क्या तैयारी रखनी चाहिए, दैनिक भास्कर ने ये सवाल डिफेंस एक्सपर्ट रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी से पूछे।
इन सवालों की दो वजह हैं-
पहली: भारत सात देशों के साथ जमीनी सीमा साझा करता है। इनमें बांग्लादेश से 4,096 किमी, चीन से 3,488 किमी, पाकिस्तान से 3,323 किमी, नेपाल से 1,751 किमी, म्यांमार से 1,643 किमी, भूटान से 699 किमी और अफगानिस्तान (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर) से 106 किमी सीमा सटी है। श्रीलंका और मालदीव वाटर बॉर्डर वाले देश हैं।
दूसरी: पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भारत में आतंकी घुसपैठ करते रहे हैं। कई इलाकों में ओपन बॉर्डर हैं, जहां निगरानी न के बराबर रहती है।
अब रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ की बात
सवालः हमास ने जैसे अटैक किया, उससे भारत की सुरक्षा एजेंसियों को क्या सीख लेनी चाहिए?
सतीश दुआः 2006 में फिलिस्तीन इंतिफादा यानी इजराइल के खिलाफ विद्रोह हुआ था। उसी में पहली बार पत्थरबाजी की गई थी। पत्थर को वेपन नहीं माना जाता, इसलिए ये तरीका बहुत कामयाब रहा। पाकिस्तान और कश्मीरी अलगाववादियों ने इसी से सीख ली और 2009 में भारत में पत्थरबाजी की शुरुआत हुई।
2018 तक कश्मीर में ये बड़ी समस्या बन गई थी। आतंकियों को छुड़ाने के लिए पत्थरबाजी को हथियार बना लिया गया था। पाकिस्तान अभी अपने अंदरूनी मसलों में फंसा है, दूसरी तरफ कश्मीर में हालात बेहतर हो रहे हैं। इसलिए हमें इजराइल जैसे हमलों से निपटने के लिए अलर्ट रहने की जरूरत है।
सवालः इन हालात में भारत को आप कहां देखते हैं?
सतीश दुआः भारत हमेशा से अपना रास्ता अपनाता आया है। रूस और यूक्रेन की लड़ाई में हमारे दोनों से अच्छे रिश्ते हैं। हमने अपने राष्ट्रीय हित देखते हुए ही कदम उठाए हैं। भारत अपना इंडिपेंडेंट स्टैंड लेगा। टेररिज्म से भारत भी पीड़ित है। 75 साल से हम कई स्टेट में इससे जूझ रहे हैं। 26/11 का हमला हुआ, पार्लियामेंट पर अटैक हुआ, कश्मीर और मणिपुर में ऑपरेशन चल रहे हैं।
सवालः इजराइल के पास बेस्ट इंटेलिजेंस एजेंसी, सर्विलांस सिस्टम और सैटेलाइट हैं। फिर कैसे हमास ने इतना बड़ा हमला कर दिया?
सतीश दुआः ये साफ तौर पर इजराइल का इंटेलिजेंस फेलियर है। मोसाद दुनिया की बेहतरीन इंटेलिजेंस एजेंसियों में से एक है। कई साल से इजराइल और फिलिस्तीन में विवाद चल रहा है, फिर भी मोसाद को इतने बड़े हमले की भनक नहीं लगी।
सवालः इजराइली आर्मी इस अटैक का कैसे जवाब देगी, उसकी रणनीति क्या हो सकती है?
सतीश दुआः इजराइल के प्रधानमंत्री ने रणनीति का खुलासा कर दिया है। उन्होंने शनिवार को ही कह दिया था कि युद्ध शुरू हो गया है। मैंने इजराइल के चेकपॉइंट से गाजा को देखा है। वो बहुत घनी आबादी वाला इलाका है। ऐसी जगह एक बम गिरेगा तो 100 से ज्यादा लोग हताहत हो सकते हैं। इसीलिए गाजा से भारी कैजुएलिटी की खबरें आ रही हैं।
सवालः इजराइली फोर्स की क्षमता और ताकत कैसी है, इजराइल किस हद तक कार्रवाई करने में सक्षम है?
सतीश दुआः इजराइल की फोर्स बहुत ताकतवर है। उनके यहां सिटीजन फोर्सेज कॉन्सेप्ट बहुत पावरफुल है। हर इजराइली 2 साल मिलिट्री सर्विस में देता है। उनमें से कुछ तो रेगुलर सोल्जर हो जाते हैं, कुछ जरूरत पड़ने पर सेना में आते हैं।