आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पुष्कर के 10 से 12 परिवार 4 दिन से इजराइल के युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए हैं। गोलियों और बम धमाकों के बीच दिन-रात सायरन की आवाज आती है।
सायरन की आवाज का मतलब-जिंदगी बचाने के लिए सिर्फ 30 सेकेंड का वक्त। इन 30 सेकेंड में सेफ हाउस (शेल्टर होम) में घुसना पड़ता है और तकरीबन 20 से 30 मिनट अंदर ही रहना पड़ता है। इसमें जरा सी चूक का मतलब-मौत।
इजराइल में हालात बुरी तरह बिगड़े हुए हैं। ऐसे हालात में एक राजस्थानी शेफ देश लौटने के बजाय वहां रहकर फौजियों के लिए खाना बना रहे हैं।
भास्कर रिपोर्टर अभिषेक शर्मा ने वीडियो कॉल के जरिए इजराइल में रह रहे सुमित शर्मा और अनिल गौड़ से बातचीत की और वहां रह रहे राजस्थानियों के बारे में जानने की कोशिश की।
पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
सुमित शर्मा अपनी इजरायली मूल की दोस्त के साथ 2013 में इजराइल गए थे। वहां उन्होंने नॉर्थ के गोलान हाइट्स में रेस्टोरेंट का काम शुरू किया। बीते 10 सालों में सुमित शर्मा इजराइल में सेलिब्रिटी शेफ के रूप में कालू बाबा के नाम से मशहूर हो गए।
वे गोलन हाइट्स के पास रहते हैं। जो लेबनान और सीरिया के बॉर्डर से करीब 80 से 100 किमी दूर है। जहां इस वक्त हालत बद से बदतर हो चुके हैं।
सुमित बोले- मैं गार्डन में कॉफी पी रहा था तभी गिरने लगी मिसाइलें
हमास के लड़ाकों ने साउथ का एरिया पूरा तबाह कर दिया। नॉर्थ भी अब ज्यादा समय तक सेफ नहीं है। लड़ाकों ने बच्चे, बूढ़े और महिलाओं तक को गोली मार दी। पिछले 12 सालों में इतना डरावना मंजर आज तक नहीं देखा।
11 अक्टूबर को मैं घर के गार्डन में बैठकर कॉफी पी रहा था, तभी इमरजेंसी सायरन सुनाई दिया। हमें समझ आ गया था कि कुछ देर में हमला होने वाला है।
तभी मैं भागकर अपने घर में बने बंकर में आ गया और वहां करीब 1 घंटे तक छुपा रहा। बाहर आए तो पता चला सायरन बजने के कुछ सेकेंड बाद ही घर के आस-पास इलाके में मिसाइलें गिराई गई हैं।
जान बचाने के लिए महज चंद सेकेंड, फिर जान का खतरा सायरन बजने के बाद 30 सेकेंड का काउंट डाउन शुरू हो जाता है। इन्हीं 30 सेकेंड में लोगों को सेफ हाउस तक जाना होता है।
कुछ लोगों ने अपने घरों में ही अंडर ग्राउंड सेफ हाउस बना रखे हैं। मेरे घर भी मैंने इस तरह का सेफ हाउस बना रखा है।
जिनके घरों में ये सेफ हाउस नहीं है तो उनके लिए 200 से 300 मीटर पब्लिक सेफ हाउस है। यहां तक पहुंचने के लिए महज कुछ सेकेंड होते हैं, नहीं तो जान का खतरा बढ़ जाता है। यहां कम से कम 20 से 30 मिनट उसके अंदर रहना होता है।
अनिल बोले- ये मुंबई के 26/11 के हमले जैसा
अनिल 2011 में पुष्कर से इजराइल गए थे। उन्होंने वहां इजरायली मूल की लड़की से शादी कर ली। अनिल लेबनान बॉर्डर से करीब 150 से 200 किमी दूर इजराइल के शहर हाइफा में रह रहे हैं और ट्रेवल एजेंसी में काम करते हैं।
भास्कर से बातचीत में अनिल बोले- बीते 10-12 सालों में कई बार तनावपूर्ण स्थिति देखी लेकिन इतने बुरे हालात आज से पहले कभी नहीं आए। इजराइल के साउथ में स्थिति ज्यादा तनावपूर्ण है। नॉर्थ में लेबनान बॉर्डर से हिजबुला के हमले का डर बना हुआ है ।
26/11 में जिस तरह मुंबई ताज होटल पर आतंकवादियों ने हमला किया था। ठीक वैसे ही हमास के 200 से 300 लड़ाके इजराइल में घुस कर तबाही मचा रहे हैं। आम नागरिकों, बूढ़े, महिलाओं और यहां तक कि बच्चों को भी गोलियों से भून दिया गया है।
मेरे दोस्त के रिश्तेदारों को घर में घुसकर मार दिया
दो दिन पहले हमलावरों ने हथियारों के साथ मेरे दोस्त के घर में घुसकर हमला कर दिया और उसे मार दिया।
इजराइल के नॉर्थ में भी रॉकेट से हमले हो रहे हैं । जब भी कोई इमरजेंसी होती है तो सायरन बजने लग जाते हैं। एक दिन पहले ही मेरे घर के आस-पास भी रॉकेट से हमला हुआ था। हमले बढ़ने लगे थे, लेकिन इजराइल के डिफेंस रॉकेट सिस्टम ने नाकाम कर दिया ।
इन बुरे हालातों में भी राहत की बात ये है कि खाने और दवाइयों की कोई कमी नहीं है। लोग सुपरमार्केट से ज्यादा संख्या में सामान खरीदकर स्टोर कर रहे हैं।