आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इस बार हमास को पूरी तरह जड़ से खत्म कर देंगे। किसी तरह का समझौता किए बिना इजराइली सेना पूरी ताकत से गाजा में हमास के खिलाफ ऑपरेशन चलाएगी।’

रक्षामंत्री योव गैलेंट के इस बयान के बाद इजराइल ने गाजा पर हमले के लिए 1 लाख सैनिक भेजे हैं। 3 लाख 60 हजार से ज्यादा रिजर्व सैनिकों को जुटाया जा रहा है। सभी को अंदेशा है कि इजराइल गाजा पर जमीनी कब्जा करने जा रहा है।

भास्कर एक्सप्लेनर में जानेंगे गाजा पर जमीनी कब्जा करने में इजराइल को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा और क्या ऐसा करके इजराइल किसी ट्रैप में फंसने जा रहा है?

इजराइल के अगले कदम को समझने के लिए दो पुराने किस्से जानना जरूरी है…

  1. 1978 का ऑपरेशन लिटानी

मार्च 1978 की बात है। फिलिस्तीन समर्थक लड़ाकों ने इजराइल के दक्षिणी सीमा वाले इलाके में एक बस को हाईजैक कर लिया। बस में सवार 38 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी। घटना के बाद इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में उग्रवादियों के खात्मे के लिए एक ऑपरेशन चलाया।

इसे ऑपरेशन लिटानी नाम दिया गया। कुछ हफ्तों के ऑपरेशन के बाद इजराइल ने फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन यानी PLO के लड़ाकों को दक्षिणी लेबनान से पीछे धकेल दिया और उस इलाके के अपने कब्जे में ले लिया।

  1. 2006 में हिजबुल्लाह के खिलाफ ऑपरेशन

2006 में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह संगठन ने इजराइल पर हमला कर दिया। इसके जवाब में इजराइली सेना ने एक ऑपरेशन चलाया। इजराइल ने लेबनान पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। जमीन से हमले के लिए इजराइली सेना लेबनान में घुस गई। 34 दिनों तक चले इस ऑपरेशन में इजराइली सेना ने हिजबुल्लाह के कैंप पर कम दूरी की मिसाइलों और तोपों से गोले बरसाए। इस ऑपरेशन के खत्म होने के बाद इजराइल ने दावा किया कि उसने हिजबुल्लाह के नेटवर्क को पूरी तरह से तबाह कर दिया है।

7 अक्टूबर को हमास ने गाजा पट्टी से इजराइल पर 50 साल में सबसे बड़ा हमला किया। जाहिर है इजराइल पूरी ताकत से पलटवार करेगा। इजराइल सरकार ने अभी तक यह नहीं बताया है कि गाजा की पूरी तरह से नाकेबंदी के बाद अब आगे क्या होगा। हालांकि, जिस तरह से इजराइली सरकार ने लाखों सैनिक गाजा बॉर्डर पर भेजे हैं उससे ग्राउंड ऑपरेशन चलाने की संभावना बढ़ गई है।

8 अक्टूबर को इजराइल की सुरक्षा कैबिनेट ने कहा है कि हमारे सैन्य अभियान का लक्ष्य हमास की सैन्य और शासन करने की क्षमताओं को खत्म करना है।

इजराइली सैन्य मामलों के एक्सपर्ट याकोव लैपिन के मुताबिक हमास को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सिर्फ हवाई हमले पर्याप्त नहीं होंगे। इजराइल अपने मकसद को सिर्फ ग्राउंड ऑपरेशन के जरिए ही हासिल कर सकता है। ऐसे में इजराइल जमीनी सेना, बख्तरबंद गाड़ियों, तोप और एयरफोर्स के जरिए शहर और गांवों में हमास के खात्मे तक ऑपरेशन चला सकता है। हालांकि, यह बताना मुश्किल है कि ये ऑपरेशन कितने दिनों तक चलेगा।

गाजा पर जमीनी कब्जा करने में इजराइल के सामने 3 बड़ी चुनौतियां

वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर ईस्ट पॉलिसी में निदेशक माइकल आईन्स्टेड के मुताबिक 2006 में इजराइली सैनिकों ने हिजबुल्लाह के खिलाफ ग्राउंड ऑपरेशन चलाया था। इस बात की संभावना है कि उसके बाद गाजा में ही इजराइली सैनिकों का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य ऑपरेशन चलेगा। हालांकि, ये इतना आसान नहीं होगा। इसकी 3 बड़ी वजहे हैं…

  1. अगर इजराइली सैनिक गाजा में घुसते हैं तो यहां उनका सामना हमास के उन लड़ाकों से होगा जो इस क्षेत्र को अच्छी तरह से जानते हैं। वो भीड़-भाड़ वाली आबादी के बीच छिपकर हमला करने में माहिर हैं। एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी के मुताबिक गाजा में इजराइली सेना घुसती है तो इराक के फालुजा जैसे हालात देखने को मिल सकते हैं। दरअसल, 2004 में इराक के फालुजा वाले इलाके में सद्दाम हुसैन के समर्थक लोगों ने हिंसक विद्रोह शुरू कर दिया। इन विद्रोहियों के सफाए के लिए यहां अमेरिकी सेना ने फालुजा ऑपरेशन के नाम से एक सैन्य अभियान चलाया। स्थानीय लोग अमेरिकी सेना के खिलाफ विद्रोहियों को समर्थन देने लगे। परिणाम ये हुआ कि गली-गली में खून बहने लगा। ऐसे में संभावना है कि इजराइली सैनिकों के गाजा में घुसने के बाद स्थानीय लोग हमास के लड़ाकों को समर्थन देने लगें।
  2. 2006 के बाद गाजा पर हमास का शासन हो हुआ। तभी से हमास के लड़ाके इजराइली सेना से लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। वह लंबे समय से इस वक्त का इंतजार कर रहे थे। पहले की तुलना में अब हमास ने कम समय में एक्यूरेट फायरिंग के मामले में भी महारत हासिल की है। इस बार सिर्फ 20 मिनट के अंदर 5 हजार रॉकेट दागे हैं। यानी इजराइल के लिए लड़ाई आसान नहीं होगी।
  3. इजराइल में रीचमैन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डाफ्ने रिचमोंड बराक के मुताबिक हमास ने गाजा के चारों ओर सुरंगों का बड़ा जाल बनाया है। हमास के लड़ाके एक जगह से दूसरी जगह जाने और हमला करने के लिए इन सुरंगों का इस्तेमाल करते हैं। सभी तरह से कॉन्टैक्ट टूट जाने के बाद भी हमास लड़ाके इसके जरिए एक-दूसरे के संपर्क में होते हैं। ऐसे में हमास लड़ाकों का आपस में संपर्क तोड़े बिना इजराइली सैनिकों के लिए यहां ऑपरेशन चलाना काफी कठिन होगा।