नई दिल्ली । देश में कोरोना के घातक वायरस ने अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों मुताबिक जब कोई संक्रामक रोग महामारी के चरण से हटकर स्थानिक चरण में पहुंचता है तो समय-समय पर संक्रमण के मामलों में वृद्धि और कमी एक सामान्य घटना है। कोरोनो वायरस के मामलों में मौजूदा बढ़ोतरी के देश के कुछ जिलों तक सीमित होने का उल्लेख करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि मास्क नहीं पहनना, यात्रा और सामाजिक संपर्क में बढ़ोतरी और कोविड के टीके की बूस्टर खुराक लगाने में कोताही संक्रमण वृद्धि के संभावित कारण हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सार्स कोव-2 एक आरएनए वायरस है, जो पहले ही 1,000 से अधिक उत्परिवर्तन देख चुका है, भले ही चिंता वाले संक्रमण स्वरूपों की संख्या केवल पांच है। जब कोई बीमारी महामारी से स्थानिक चरण में संक्रमण करती है तो बार-बार संक्रमण में वृद्धि और कमी एक ‘सामान्य घटना’ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अस्पताल में भर्ती होने और मरने वालों की संख्या में गंभीरता या नाटकीय बदलाव नहीं होता है, तब तक केवल मामलों में वृद्धि चिंता का विषय नहीं है।

महाराष्ट्र, केरल, दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, गुजरात, गोवा और पंजाब में 10 जून से कोरोना संक्रमण के साप्ताहिक मामलों और संक्रमण दर में वृद्धि दर्ज की गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारत के 51 जिलों में साप्ताहिक कोविड की संक्रमण दर 10 प्रतिशत से अधिक है, इनमें केरल के 12 जिले, मिजोरम के सात और महाराष्ट्र तथा असम के पांच-पांच जिले शामिल हैं। राजस्थान के 10 और दिल्ली के पांच जिलों सहित देश के 53 जिलों में साप्ताहिक संक्रमण दर पांच से 10 प्रतिशत के बीच है। एक महामारी विज्ञानी एवं संक्रामक रोग चिकित्सक का कहना है कि कोरोना वायरस उतना ही आसपास है जितना कुछ महीने पहले था।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘इसलिए, समय-समय पर संक्रमणों की संख्या में वृद्धि और गिरावट बहुत अपेक्षित है, क्योंकि संक्रामक और श्वसन रोग इसी तरह व्यवहार करते हैं। यही कारण है कि मामलों में हर वृद्धि चिंता या परेशानी का कारण नहीं है।’ ‘अब समय आ गया है कि कोविड संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने और गंभीर नैदानिक ​​​​परिणामों को ट्रैक किया जाए। अगर इन मापदंडों में भारी बदलाव नहीं होता है, तो चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।’