आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : एक भारतीय नर्स हत्या के आरोप में यमन की जेल में बंद है। उसकी मां ने दिल्ली हाई कोर्ट में यमन जाने के लिए अर्जी दी। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को एक उनकी यात्रा पर विचार करने का निर्देश दिया। इस पर विदेश मंत्रालय का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से उनका यमन जाना ठीक नहीं है। क्योंकि फिलहाल वहां भारतीय राजनयिक उपस्थित नहीं हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा- यमन में सिविल वॉर के कारण भारतीय दूतावास को जिबूती में शिफ्ट किया गया है। साथ ही राजधानी सना में बनी नई व्यवस्था के साथ हमारे कोई औपचारिक संबंध नहीं हैं। इसलिए वहां हमारा डिप्लोमैटिक प्रेजेंस नहीं है। ऐसे में हम चिंतित हैं कि आपकी देखभाल और सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा। आपकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आपको यमन जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
7 साल से जेल में कैद भारतीय महिला
यमन जेल में कैद भारतीय महिला का नाम निमिषा प्रिया है। वो केरल की रहने वाली है। निमिषा ने यमन में अपने बिजनेस पार्टनर की हत्या की थी। 2017 में उसे तलाल अब्दो मेहदी नाम के शख्स को कथित रूप से बेहोशी का इंजेक्शन देकर मारने का दोषी पाया गया। कोर्ट ने सजा-ए-मौत दी। सुप्रीम कोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दायर की गई, जिसे खारिज कर दिया गया।
बेटी के बचाने यमन जाना चाहती है मां
निमिषा ने तलाल को इसलिए मारा, क्योंकि उसके पास निमिषा का पासपोर्ट था और वह इसे वापस लेकर भारत लौटना चाहती थी। अब निमिषा की मां वहां जाकर मारे गए शख्स के परिवार को मुआवजा देकर बेटी की जान बचाना चाहती हैं।
इस मामले पर एक नजर
रिपोर्ट के मुताबिक निमिषा करीब 12 साल पहले यमन गई थीं। उनके पति और बेटी 2014 में भारत लौट आए थे। नौकरी की वजह से निमिषा नहीं लौट सकीं थीं। दरअसल, उन्होंने यमन के नागरिक तलाल अब्दो मेहदी (मृतक) के साथ एक हॉस्पिटल शुरू किया।
कुछ वक्त बाद दोनों में विवाद शुरू हो गया। तलाल ने निमिषा का पासपोर्ट छीनकर अपने पास रख लिया। निमिषा ने जब इसकी शिकायत यमन की अथॉरिटीज से की तो तलाल ने उन्हें बताया कि वह निमिषा का पति है। अथॉरिटीज ने कहा कि यह पति-पत्नी के बीच का मामला है। हम दखल नहीं देंगे।
25 जुलाई 2017 को निमिषा ने तलाल को बेहोशी का इंजेक्शन यह सोचकर दिया कि वह अपना पासपोर्ट हासिल कर लेंगी और भारत वापस आ जाएंगी, लेकिन तलाल की मौत हो गई।
निमिषा ने एक और शख्स की मदद से तलाल के शव को ठिकाने लगा दिया, लेकिन चार दिन बाद ही मामले का खुलासा हो गया और निमिषा को गिरफ्तार कर लिया गया। निमिषा को सजा-ए-मौत सुनाई गई। उनके सहयोगी को ताउम्र जेल की सजा सुनाई गई। तब से यह मामला चल रहा है।