आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इजराइल और हमास की जंग जारी है। इजराइल दुनिया के ज्यादातर हिस्सों से आ रहे दबाव के सामने घुटने टेकने से साफ इनकार कर चुका है। उसने गाजा को चारों तरफ से घेरा हुआ है। ग्राउंड ऑपरेशन जबदस्त तेजी से किए जा रहे हैं।
दूसरी तरफ, अमेरिका ने हमास का फाइनेंशियल नेटवर्क खत्म करने का जिम्मा उठाया है। इसके लिए अमेरिकी एजेंसियां अपने तगड़े नेटवर्क का इस्तेमाल कर रही हैं। मिडिल-ईस्ट के बड़े अखबार ‘अल मॉनिटर’ की स्पेशल रिपोर्ट में इस मामले की जानकारी दी गई है।
गाजा छिना तो हमास भी खत्म
रिपोर्ट के मुताबिक- आतंकी संगठन हमास के लिए गाजा की अहमियत सिर्फ पैसा जुटाने तक सीमित है। इस काम में उसको ईरान की मदद मिलती रही है। हमास के पास प्राईवेट डोनर्स भी हैं जो उसे फंड्स मुहैया कराते हैं।
2007 में हमास ने गाजा पर कब्जा किया। इसके बाद जबरन उगाही और टैक्स के जरिए बेहिसाब पैसा कमाया। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के पूर्व अफसर मैथ्यू लेविट कहते हैं- हमास एक्सटॉर्शन और टैक्स से फंड्स जुटाता है। गाजा को कतर से मदद मिलती है, इस पर टैक्स लगाया जाता है। गाजा को UN से फंड्स मिलते हैं, हमास इस पर भी टैक्स लगाता है।
मैथ्यू लेविट के बारे में खास बात ये है कि वो काउंटर टेरेरिज्म और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों के एक्सपर्ट हैं और कुछ वक्त के लिए CIA और दूसरी इंटेलिजेंस एजेंसीज के लिए भी काम कर चुके हैं। लिहाजा, वो हमास के फाइनेंशियल नेटवर्क को भी बहुत करीब से समझते हैं।
अब एक्शन में अमेरिका
लैविट कहते हैं- गाजा में हमास का खर्च और कमाई पर नजर डालिए। फंड्स अनगिनत सोर्सेज से मिलते हैं। सवाल ये है कि खर्च कहां और कितना होता है? हर साल करीब 40 करोड़ डॉलर वो टैक्स, एक्सटॉर्शन और कस्टम फीस से कमाता है। इससे तीन गुना ज्यादा उसे ईरान और दूसरे देशों में फैले नेटवर्क से मिलता है।
हमास के इसी फाइनेंशियल नेटवर्क को खत्म करने के लिए अमेरिका एक्टिव हो गया है। इसके लिए इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम और दूसरे रेवेन्यू सिस्टम की बारीकी से जांच चल रही है। इजराइल-हमास जंग शुरू होने के बाद कई कदम उठाए गए हैं।
हमास के मेंबर्स और नेताओं के एसेट्स को जब्त किया गया, इन्होंने पैसा रियल एस्टेट और कुछ सेक्टर्स में इन्वेस्ट किया है। माना जाता है कि यह इन्वेस्टमेंट 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा है।
इसके अलावा सूडान, अल्जीरिया, तुर्किये और UAE में हमास नेताओं की कंपनियां भी हैं। इनके खिलाफ भी एक्शन लिया गया है। कतर में एक अकाउंट से हमास की मिलिट्री विंग को लाखों डॉलर ट्रांसफर किए गए।
पब्लिक अलर्ट भी जारी
अमेरिका के फाइनेंशियल क्राइम्स इनफोर्समेंट नेटवर्क ने हाल ही में एक पब्लिक अलर्ट जारी किया। इसमें आम लोगों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स से कहा गया है कि वो हमास की फंडिंग के सोर्सेज तलाशने में मदद करें, क्योंकि हमास को अमेरिका, UN और यूरोपीय यूनियन आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं।
इस डिपार्टमेंट के अफसर ब्रायन नेल्सन ने कहा- हमासे पास ऐसे कई रास्ते और टूल्स हैं, जिनके जरिए हमास के फाइनेंशियल नेटवर्क तक पहुंचा जा सकता है। अगर इनकी जांच की जाए तो फंड मुहैया कराने की फेहरिस्त में ईरान सबसे ऊपर होगा।
अमेरिकी सरकार का अंदाजा है कि ईरान हमास और दूसरे फिलिस्तीनी आतंकी संगठनों को हर साल करीब 10 करोड़ डॉलर देता है। हमास की पॉलिटिकल विंग के चीफ इस्माइल हानिया ने पिछले साल अल जजीरा टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में माना था कि ईरान ने उनके संगठन को 7 करोड़ डॉलर की सैन्य मदद मुहैया कराई है।
अमेरिका ने तेहरान में हमास के दूत पर पाबंदी लगा दी है। ईरानी सेना हमास, हिजबुल्लाह, इस्लामिक जिहाद और दूसरे आतंकी संगठनों को ट्रेनिंग देती है। इनके सदस्यों पर भी सख्त पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं। यह काम काफी तेजी से पहले भी चल रहा था। हालांकि, रूस और चीन की तरफ से पैदा की गई अड़चनों की वजह से दिक्कतें भी आईं।
फाइनेंशियल नेटवर्क तोड़ना सबसे जरूरी
अटलांटिक काउंसिल के पूर्व ट्रेजरी स्कॉलर किम्बरे डोनोवेन कहते हैं- अमेरिकी सरकार को बहुत अच्छे से पता है कि टेरेरिज्म के मामलों में क्या चल रहा है। हमास को मिल रही फंडिंग को रोकने के लिए ईरान और दूसरे संगठनों पर कानूनी कार्रवाई करनी होगी। कंपनी, व्यक्ति या संगठन कोई भी हो, सबको कानून के दायरे में लाना बेहद जरूरी है।
अमेरिकी अफसरों ने हाल ही में कतर, सऊदी अरब और दूसरे अरब देशों का दौरा किया था। इसमें हमास की फंडिंग पर सख्ती से रोक लगाने के तरीकों पर विचार किया गया था।
कार्डिफ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर निकोलस रायडर कहते हैं- दिक्कत ये है कि टेरेरिज्म फाइनेंसिंग के अनगिनत सोर्स हैं। चैरिटेबल ट्रस्ट तक इस्तेमाल किए जाते हैं। हमास को तो समाज सेवा के नाम पर ऑनलाइन डोनेशन भी मिलता है। इसका इस्तेमाल वो आतंकी हमलों में करता है। हल सिर्फ ये है कि जितनी तेजी से आतंकी संगठन फंड जुटाने के तरीके खोज रहे हैं, उन्हें रोकने के लिए कानून और जांच एजेंसियों को भी उतनी ही तेजी दिखानी होगी।