सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: सुप्रीम कोर्ट गुरुवार 9 मई को गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) से जुड़े मामले में सुनवाई करेगा। पिछली सुनवाई 2 मई को हुई थी। इसमें कोर्ट ने केंद्र से GST एक्ट के तहत 1 से 5 करोड़ रुपए के डिफॉल्ट के लिए जारी किए गए नोटिस और गिरफ्तारियों का डेटा मांगा है। कोर्ट ने कहा कि कभी-कभी गिरफ्तारियां नहीं की जाती हैं, लेकिन लोगों को नोटिस जारी करके, गिरफ्तारी की धमकी देकर परेशान किया जाता है।

कोर्ट ने कहा कि हम नागरिकों की आजादी छीनने से बचाने के लिए दिशा-निर्देश तय कर सकते हैं। हम उनका उत्पीड़न नहीं होने देंगे। दरअसल, कोर्ट GST एक्ट, कस्टम एक्ट और प्रिवेंशन ऑन मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों को चुनौती देने वाली 281 याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

अधिकारियों पर लगा शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप

दरअसल, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने कहा था कि GST एक्ट के तहत अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हैं। गिरफ्तारी नहीं की जाती है, लेकिन लोगों को नोटिस जारी करके गिरफ्तारी की धमकी दी जाती है। यह लोगों की स्वतंत्रता को कम कर रहा है।

इस पर जस्टिस संजीव खन्ना, एमएम सुंदरेश और बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि सभी मामलों में लोगों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जा सकता है। बेंच ने कहा कि धोखाधड़ी के मामलों और अनजाने में हुई चूक के बीच अंतर होना चाहिए।

केंद्र ने कहा- राज्यों से जुड़ा डेटा इकट्ठा करना मुश्किल

कोर्ट ने GST एक्ट की धारा 69 में गिरफ्तारी की शक्तियों पर स्थिति साफ न होने पर चिंता जाहिर की। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि वे सेंट्रल GST एक्ट के तहत नोटिस और गिरफ्तारियों से जुड़ा डेटा इकट्ठा करेंगे।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों से संबंधित ऐसी जानकारी इकट्ठा करना मुश्किल होगा, लेकिन वे अगली सुनवाई के दिन बेंच के सवालों का जवाब देने की कोशिश करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 9 मई को होगी।

2017 में लागू हुआ था GST

GST यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स एक इनडायरेक्ट टैक्स है। इसे वैराइटी ऑफ प्रीवियस इनडायरेक्ट टैक्स (VAT), सर्विस टैक्स, परचेज टैक्स, एक्साइज ड्यूटी और कई इनडायरेक्ट टैक्स को रिप्लेस करने के लिए 2017 में लागू किया गया था। GST में 5%, 12%, 18% और 28% के चार स्लैब हैं।