सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /  आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल  /   नई दिल्ली  :   नई टैक्स नीति के तहत ईएलएसएस (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) फंड्स में निवेश करना निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। बीते कुछ सालों में ईएलएसएस फंड्स की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है, क्योंकि यह लंबी अवधि में अनुशासित निवेश और कम्पाउंडिंग रिटर्न का अवसर प्रदान करता है।

ईएलएसएस फंड्स में न्यूनतम 3 साल की लॉक-इन अवधि होती है। इसका मतलब है कि निवेशक इस अवधि के दौरान अपने निवेश को नहीं निकाल सकते। इस लॉक-इन की वजह से यह एक अनुशासित लॉन्ग-टर्म निवेश विकल्प बनता है, जो निवेशकों को दीर्घकालिक लाभ देने में सक्षम है।

हालांकि, नई टैक्स रिजीम में ईएलएसएस में निवेश करने पर अब कोई टैक्स छूट (धारा 80सी के तहत) नहीं मिलती। यानी निवेशक को टैक्स बेनेफिट नहीं मिलेगा, जो पहले ईएलएसएस के सबसे बड़े फायदे में से एक था। इसके अलावा, जैसा कि सभी इक्विटी फंड्स में होता है, ईएलएसएस निवेश में मार्केट रिस्क शामिल रहता है।

फायदे के तौर पर, ईएलएसएस फंड लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखता है। छोटे निवेश के माध्यम से भी निवेशक नियमित रूप से अमाउंट जोड़ सकते हैं और कंपाउंडिंग का फायदा उठा सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर निवेशक लंबी अवधि के लिए अनुशासित निवेश करना चाहते हैं और उन्हें मार्केट जोखिम सहने की क्षमता है, तो ईएलएसएस फंड्स निवेश का एक अच्छा विकल्प हो सकता है। वहीं, जो निवेशक तुरंत टैक्स बेनेफिट चाहते हैं या कम रिस्क लेना पसंद करते हैं, उनके लिए यह विकल्प सीमित हो सकता है।

#ELSSFUND #निवेश #टैक्सबेनेफिट #लॉकइन #कम्पाउंडिंग