आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/ आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल:  दिल्ली शराब नीति केस में ED ने मनीष सिसोदिया की 7 दिन की और रिमांग मांगी है। जांच एजेंसी ने कोर्ट में कहा कि LG ने जब इस मामले की शिकायत की तो सिसोदिया ने अपना फोन बदल दिया था। लेकिन एजेंसी ने उनके मोबाइल डेटा को फिर से निकाल लिया है। अब एजेंसी उनके ईमेल और मोबाइल फोन से निकाले गए डेटा का एनालिसिस कर रही है। अभी हमें सिसोदिया से और सवाल पूछने हैं।

सिसोदिया के वकील इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ED ने सिसोदिया के खिलाफ किसी क्राइम का जिक्र नहीं किया है। वहीं, जब CBI मामले में पूछताछ कर चुकी है तो ED को पूछताछ करने की क्या जरूरत है? उधर, कोर्ट ने सिसोदिया की रिमांड पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। कुछ ही देर में अदालत फैसला सुनाएगी।

ED ने 9 मार्च को सिसोदिया को गिरफ्तार किया था

जांच एजेंसी ने सिसोदिया को 9 मार्च को दिल्ली शराब नीति केस में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तिहाड़ जेल से गिरफ्तार किया था। इसके बाद 10 मार्च को सिसोदिया को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। ED ने कोर्ट से सिसोदिया की 10 दिन की रिमांड मांगी थी। इसके बाद कोर्ट ने पूर्व डिप्टी सीएम को (7 दिन) 17 मार्च तक की रिमांड पर भेज दिया था, जो आज खत्म हो गई।

इससे पहले 26 फरवरी को CBI ने उन्हें दिल्ली शराब नीति केस में 8 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। कोर्ट सिसोदिया की जमानत याचिका पर 21 मार्च को दोपहर 2 बजे सुनवाई करेगी।

पिछली सुनवाई में ED ने ये दलीलें दी थीं

  1. सिसोदिया के प्रतिनिधि ने के कविता से मुलाकात की

ED के वकील जोहैब हुसैन ने कहा था, ‘सिसोदिया के असिस्टेंट विजय नायर इस पूरी साजिश को कोऑर्डिनेट कर रहा था। इस घोटाले में सरकारी तंत्र, बिचौलिये और कई अन्य लोग शामिल हैं। ये साजिश नायर, सिसोदिया, तेलंगाना के चीफ मिनिस्टर के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता और कई दूसरे लोगों ने मिलकर रची। इस मामले में 219 करोड़ रुपए के मनी ट्रेल का पता चला है।’

  1. साउथ के ग्रुप ने AAP नेताओं ने 100 करोड़ घूस दी

उन्होंने कहा, ‘दक्षिण के ग्रुप ने आप नेताओं को 100 करोड़ की घूस दी। एक ग्रुप बनाया गया ताकि दिल्ली में 30% शराब कारोबार को चलाया जा सके। दस्तावेज दिखाते हैं कि नायर ने सिसोदिया के प्रतिनिधि के तौर पर कविता से मुलाकात की। नायर कविता को यह बताना चाहता था कि सिसोदिया किस तरह से लिकर पॉलिसी को प्रभावित कर सकते हैं।’

  1. एक साल में 14 फोन तोड़े, वे सिसोदिया के नाम पर नहीं थे

जोहेब ने कहा, ‘एक साल के समय में 14 फोन इस्तेमाल किए गए और बदले गए। इन्हें तोड़ भी दिया गया। सिसोदिया ने उन फोन का इस्तेमाल किया, जिन्हें दूसरों ने खरीदा था। सिम कार्ड भी सिसोदिया के नाम पर नहीं था ताकि बाद में वो अपने बचाव में इस बात को इस्तेमाल कर सकें।’

  1. सिसोदिया शुरुआत से ही टालमटोल कर रहे हैं

उन्होंने दलील दी, ‘एक फोन भी सिसोदिया के नाम पर नहीं थे। एक सिम कार्ड देवेंदर शर्मा के नाम पर था। यह दिखाता है कि इस केस में बड़े पैमाने पर सबूतों को तबाह किया गया। आप खुद देखिए कि हम सिसोदिया की कस्टडी क्यों चाहते हैं। यह शुरुआत से ही टालमटोल कर रहे हैं।’