नई दिल्ली । भारत ने पिछले दिनों ऑटोनमस फ्लाइंग विंग टेक्‍नोलॉजी डेमॉन्‍स्‍ट्रेटर का पहला फ्लाइट टेस्‍ट किया। इसके साथ ही देश ड्रोन टेक्‍नोलॉजी में आत्‍मनिर्भर होने की तरफ बढ़ चुका है। डिफेंस रिसर्च्र एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) की तरफ से तैयार ड्रोन पर रक्षा मंत्रालय की तरफ से बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि इस ड्रोन की पहली उड़ान एक मील का पत्‍थर है और अहम टेक्‍नोलॉजी के विकास की तरफ एक बड़ा कदम है।

ड्रोन को स्विफ्ट या स्‍टेल्‍थ विंग फ्लाइंग टेस्‍टबेड भी कहा जा रहा है। भारतीय सेनाओं का स्‍वदेशीकरण करने की दिशा बड़ा कदम माना जा रहा है। ये ड्रोन घातक फाइटर ड्रोन का ही वर्जन है। ड्रोन की मदद से दुश्‍मन पर सटीक निशाना लगाया जा सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार भारत का ये ड्रोन चीन के एचक्यू-9/पी का जवाब है।

चीन का ये ड्रोन 100 किलोमीटर तक की रेंज में दुश्‍मन को जवाब दे सकता है। इसके अलावा क्रूज मिसाइल और एयरक्राफ्ट को एक सिंगल शॉट में ढेर कर सकता है। सूत्रों की मानें ये रेंज बस एयरक्राफ्ट के खिलाफ ही है। क्रूज मिसाइल और छोटे टारगेट्स के लिए ये रेंज 25 किलोमीटर से भी कम है।

भारत का घातक ड्रोन हिमालय बॉर्डर पर विवाद में चीन के ड्रोन की तरह ही मजबूत रोल अदा कर सकता है। साल 2020 में रिपोर्ट आई थी कि चीन ने जमीन से आसमान तक हमला करने वाली मिसाइल को भारत-चीन-नेपाल ट्राई बॉर्डर इलाके में तैनात कर दिया है। चीन का मकसद इसके जरिए क्षेत्र में एयरडिफेंस नेटवर्क को मजबूत करना था।