सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: धोनी ने 21 साल पहले आज ही जड़ा था 183 रन का तूफानी शतक
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 31 अक्टूबर की तारीख महेंद्र सिंह धोनी की ऐतिहासिक पारी के लिए हमेशा याद की जाती है। आज ही के दिन वर्ष 2005 में धोनी ने श्रीलंका के खिलाफ जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में नाबाद 183 रन की विस्फोटक पारी खेली थी। इस दौरान उन्होंने केवल 145 गेंदों का सामना किया और 15 चौके तथा 10 छक्के लगाए। उनकी इस पारी का कुल योग 25 चौके-छक्कों का रहा। खास बात यह है कि पुरुष वनडे क्रिकेट में किसी विकेटकीपर बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर का उनका रिकॉर्ड आज भी कायम है।
सचिन के जल्दी आउट होने के बाद संभाली पारी श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवर में चार विकेट पर 298 रन बनाए थे। कुमार संगकारा ने नाबाद 138 रन और महेला जयवर्धने ने 71 रन की पारी खेली। भारत को जीत के लिए 299 रन का लक्ष्य मिला। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को शुरुआती झटका तब लगा, जब सचिन तेंदुलकर पहले ही ओवर में केवल दो रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए धोनी ने वीरेंद्र सहवाग के साथ पारी को आगे बढ़ाया। सहवाग ने 37 गेंदों पर 39 रन बनाए। धोनी ने शुरुआत में संभलकर बल्लेबाजी की, लेकिन बाद में श्रीलंकाई गेंदबाजों पर आक्रामक हमला बोल दिया।
145 गेंदों में 183 रन बनाकर रहे नाबाद धोनी ने राहुल द्रविड़ के साथ 96 रन की साझेदारी की। द्रविड़ ने 34 गेंदों पर 28 रन बनाए। इसके बाद युवराज सिंह और धोनी ने चौथे विकेट के लिए 65 रन जोड़े। युवराज ने 24 गेंदों पर 18 रन बनाए। अंत में वेणुगोपाल राव ने नाबाद 19 रन बनाकर धोनी का साथ दिया। भारत ने 46.1 ओवर में चार विकेट खोकर 303 रन बनाए और छह विकेट से मुकाबला जीत लिया। धोनी को उनकी शानदार पारी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया।
विकेटकीपर बल्लेबाजों का विश्व रिकॉर्ड अब भी कायम धोनी की 183 रन की पारी ने उस समय ऑस्ट्रेलिया के एडम गिलक्रिस्ट के 172 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था। इसके बाद कई विकेटकीपर बल्लेबाजों ने बड़े स्कोर बनाए, लेकिन पुरुष वनडे में विकेटकीपर के रूप में 183 रन का आंकड़ा अब तक कोई पार नहीं कर पाया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने भी वर्ष 2025 में धोनी को अपने हॉल ऑफ फेम में शामिल करते हुए इस उपलब्धि को उनके करियर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में गिना था। धोनी की यह पारी केवल एक बड़ा व्यक्तिगत स्कोर नहीं थी, बल्कि लक्ष्य का पीछा करते हुए दबाव में बल्लेबाजी करने की उनकी क्षमता का भी शानदार उदाहरण बनी। 21 साल बाद भी जयपुर में खेली गई यह पारी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की यादों में ताजा है।
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