सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति वाले नए कानूनों को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है।

केंद्र सरकार ने कहा- यह दलील गलत है कि आयोग की स्वतंत्रता तभी होगी, जब सिलेक्शन पैनल में CJI या कोई न्यायिक व्यक्ति जुड़े। इलेक्शन कमीशन एक स्वतंत्र संस्था है। इस याचिका का मकसद सिर्फ राजनीतिक विवाद को खड़ा करना है।

सुप्रीम कोर्ट नए कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। ये याचिका कांग्रेस कार्यकर्ता जया ठाकुर ने दाखिल की थी। पीठ ने इन याचिकाओं पर 12 जनवरी को सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

अब जानिए क्या है पूरा मामला…

2 मार्च 2023: सुप्रीम कोर्ट का फैसला- सलेक्शन पैनल में CJI को शामिल करना जरूरी

2 मार्च 2023 को मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने आदेश दिया कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक पैनल करेगा। जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और CJI शामिल होंगे। इससे पहले सिर्फ केंद्र सरकार इनका चयन करती थी।

5 सदस्यीय बेंच ने कहा कि ये कमेटी नामों की सिफारिश राष्ट्रपति को करेगी। इसके बाद राष्ट्रपति मुहर लगाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा था कि यह प्रोसेस तब तक लागू रहेगी, जब तक संसद चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कोई कानून नहीं बना लेती।

21 दिसंबर 2023: संसद के दोनों सदनों में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा नया बिल पास

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार पिछले साल मानसून सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) बिल, 2023 लेकर आई। इस बिल के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तीन सदस्यों का पैनल करेगा। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष का नेता और एक कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। बिल में CJI को बाहर कर दिया गया था। दिसंबर में शीतकालीन सत्र के दौरान यह बिल दोनों सदनों में पास हो गया।

नए कानून पर विपक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई थी

विपक्षी दलों का कहना था कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के आदेश के खिलाफ बिल लाकर उसे कमजोर कर रही है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2023 में एक आदेश में कहा था कि CEC की नियुक्ति प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और विपक्ष के नेता की सलाह पर राष्ट्रपति करें।