सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) ने केरल के मलप्पुरम में सोमवार को सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA) के विरोध में रैली निकाली। इसमें केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा- संघ परिवार को ‘भारत माता की जय’ और ‘जय हिंद’ नारा लगाना छोड़ देना चाहिए, क्योंकि इन नारों को मुस्लिमों ने दिया था।

विजयन ने कहा- संघ के नेता जनता से भारत माता की जय और जय हिंद के नारे लगवाते हैं। क्या उन्हें पता है कि ये नारा अजीमुल्लाह खान ने दिया था। वे 19वीं सदी में मराठा पेशवा नाना साहेब के मंत्री थे। ऐसे ही ‘जय हिंद’ नारा भी मुस्लिम पूर्व डिप्लोमैट आबिद हसन ने दिया था।

विजयन ने कहा- दोनों नारों के प्रचलित होने में मुस्लिमों का हाथ है। संघ परिवार कहता है कि मुस्लिमों को भारत छोड़ देना चाहिए और पाकिस्तान भेज देना चाहिए। संघ के नेताओं को इन नारों के इतिहास को समझना चाहिए।

दरअसल, केंद्र सरकार ने सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट यानी CAA का नोटिफिकेशन 11 मार्च को जारी किया था। इससे पाकिस्तान, बांग्लादेश अफगानिस्तान से आए गैर- मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो गया। इसके खिलाफ ही केरल की लेफ्ट पार्टी ने रैली निकाली थी।

केरल के कोझीकोड में 22 मार्च को CAA के खिलाफ रैली हुई थी। इसमें केरल की लेफ्ट पार्टियों के कई नेता शामिल हुए थे।

केरल के कासरगोड में 23 मार्च को CAA के खिलाफ रैली में लेफ्ट पार्टियों के हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए थे।

विजयन बोले- धर्मनिरपेक्षता की जड़ें गहरी हैं

विजयन ने रैली के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा- CAA के खिलाफ प्रोटेस्ट में लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। इससे पता चलता है कि केरल में धर्मनिरपेक्षता की जड़ें कितनी गहरी हैं। हमें सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए एकजुट होकर लड़ना चाहिए और लोकतांत्रिक भारत बनाना चाहिए।

साथ ही विजयन ने एक अन्य पोस्ट में कहा- संघ परिवार हमारी सोसाइटी का विभाजन करना चाहती है, लेकिन केरल की जनता उनके खिलाफ एकजुट होकर लड़ रही है। हमारे राज्य में हो रहा सामाजिक विकास इस बात का उदाहरण है।

2019 में लोकसभा-राज्यसभा से बिल पास हो चुका

11 दिसंबर 2019 को राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (CAB) के पक्ष में 125 और खिलाफ में 99 वोट पड़े थे। 12 दिसंबर 2019 को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। देशभर में भारी विरोध के बीच बिल दोनों सदनों से पास होने के बाद यह कानून की शक्ल ले चुका था। इसे गृहमंत्री अमित शाह ने 9 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया था।