आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इजराइल-हमास जंग के बीच लैटिन अमेरिकी देश बोलिविया ने इजराइल के साथ डिप्लोमैटिक रिलेशन्स तोड़ दिए हैं। वहीं, कोलंबिया और चिली ने गाजा में नागरिकों की मौत की निंदा करते हुए अपने राजदूतों को तेल अवीव से वापस बुला लिया है।
बोलिविया के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर फ्रेडी मामानी ने कहा- हम गाजा में हो रहे इजराइली हमलों की निंदा करते हैं। इसलिए हमने इजराइल के साथ डिप्लोमैटिक रिलेशन्स तोड़ने का फैसला किया है।
टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, इस फैसले पर इजराइल का कहना है कि बोलिविया ने आतंक और ईरान के सामने घुटने टेक दिए हैं। दरअसल, अमेरिकी मीडिया वॉल स्ट्रीट जर्नल ने हमास और हिजबुल्लाह के सीनियर अधिकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि ईरान के सुरक्षा अधिकारियों ने इजराइल पर हमले की प्लानिंग में हमास की मदद की थी।
बोलिविया ऐसा करने वाला पहला देश
अल जजीरा के मुताबिक, बोलिविया जंग शुरू होने के बाद इजराइल से डिप्लोमैटिक रिलेशन्स तोड़ने वाला पहला देश हैं। हालांकि ये पहली बार नहीं है जब बोलिविया ने इजराइल के साथ कूटनीतिक संबंध तोड़े हों। 2009 में भी गाजा पर हुए हमलों को लेकर बोलिविया ने इजराइल से साथ संबंध तोड़ दिए थे। दोनों देशों के संबंध 2020 में बहाल हुए थे।
गाजा को मदद भेजेगा बोलिविया
इजराइल ने कहा- बोलिविया के इस कदम से ये साफ होता है कि वो हमास के आतंक का समर्थन करते हैं। वो आतंक जो हमास ने 7 अक्टूबर को फैलाया। जिसमें 1400 से ज्यादा इजराइली नागरिक मारे गए। 200-250 लोग बंधक बनाए गए।
वहीं, बोलिविया ने गाजा को मदद पहुंचाने की घोषणा भी की है। केयरटेकर विदेश मंत्री मरिया नेला प्राडा ने कहा- हम ये जंग खत्म करने की अपील करते हैं। कई निर्दोष लोग मारे गए हैं। कई फिलिस्तीनियों को घर छोड़ना पड़ा है। हमास ने बोलिविया के इस फैसले का स्वागत किया है।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन कर रहा इजराइल
इधर, चिली के प्रेसिडेंट गेब्रियल बोरिक ने इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इजराइली हमले को फिलिस्तीनी लोगों का नरसंहार बताया है। दरअसल, चिली में अरब कंट्रीज के बाहर सबसे बड़ा फिलिस्तीनी समुदाय है।
50 सालों का सबसे बड़ा हमला प्लान कर रहे थे हमास-ईरान
अमेरिकी मीडिया वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अधिकारी अगस्त से हमास के साथ मिलकर इजराइल पर 1973 के बाद जमीन, हवा और समुद्र के रास्ते अब तक के सबसे बड़े हमले की प्लानिंग कर रहे थे।
7 अक्टूबर को इजराइल पर हमास के हमले के बाद ईरान में लोगों ने जश्न भी मनाया था। लोग आतिशबाजी करते नजर आए थे। ईरान ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया था। उसने कहा था कि हमास के हमले में उसकी कोई भूमिका नहीं है। हालांकि, ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के एडवाइजर ने कहा था कि हम फिलिस्तीन के इजराइल पर किए अटैक का समर्थन करते हैं।