नई दिल्ली। एनडीए की ओर से उप राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी जगदीप धनखड़ सोमवार को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी उपराष्ट्रपति चुनाव में धनखड़ का समर्थन करने का ऐलान किया है। इसके अलावा एआईएडीएमके और बीजेडी ने भी एनडीए उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान किया है।
उनका मुकाबला संयुक्त विपक्ष की उम्मीदवार और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मार्गरेट अल्वा से होगा। भाजपा ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को आगे करके एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है।
भाजपा चुनाव में भाजपा ने धनखड़ को आगे करके एक साथ दो निशाने साधे हैं।
पहला देश की लगभग 44 फीसदी ओबीसी आबादी में एक अनुकूल सियासी संदेश देना, दूसरा राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश नाराज चल रहे जाटों को साधने का प्रयास। कृषि कानूनों के विरोध में जो किसान नाराज चल रहे थे, भाजपा के इस फैसले के बाद उनकी नाराजगी काफी कुछ दूर हो सकती है।
पूरा गणित 2022, 2023 और 2024 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. जाट बिरादरी से आने वाले धनखड़ को आगे करके केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर रहने वाले मणिपुर के राज्यपाल सत्पाल मलिक को भी एक तरीके से किनारे लगाने में मदद मिलेगी।
राजस्थान में जाटों की आबादी लगभग 10 फीसदी है। यह समुदाय 30 से 40 विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, गंगानगर, चुरू, सीकर, नागौर, हनुमानगढ़, जयपुर आदि जिलों में जाटों की सबसे अधिक जनसंख्या है।
आजादी के बाद से अब तक राज्य में भले ही जाट मुख्यमंत्री नहीं बना हो, लेकिन राज्य की राजनीति में इनकी भूमिका बेहद अहम रही है। इस समय कांग्रेस, भाजपा और आरएलपी के संयोजक जाट समुदाय से आते हैं।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल हैं। ये सभी जाट समुदाय से आते हैं।
राज्य में विधानसभा चुनाव में लगभग 20 फीसदी विधायक जाट समुदाय से निर्वाचित होकर आते हैं। राज्य में 200 विधानसभा सीटे हैं, जिन पर 30 से 40 विधायक जाट समुदाय से जीत कर आए हैं। इसी तरह राज्य की पांच लोकसभा सीटों पर भी जाट समुदाय जीत में निर्णायक भूमिका निभाता है।
इन सीटों पर हमेशा जाट समुदाय के लोग ही चुनाव जीत पाते हैं या फिर वह प्रत्याशी चुनाव जीतता है जिसका समर्थन जाट समुदाय कर रहा होता है। अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए भाजपा नेतृत्व ने सत्यपाल मलिक पर अब तक सीधी कोई कार्रवाई नहीं है और अब उनके स्थान पर जाट समुदाय से आने वाले धनखड़ को उप राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाकर इस समुदाय के प्रति सम्मान प्रकट किया है।