आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बेस्ट सेलर लेखकों-कवियों के नाम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए लिखी गई नकली किताबें आनॅलाइन बिक रही हैं। अमेरिका में यह मुद्दा तब सामने आया, जब बेस्ट सेलर लेखिका जेन फ्रीडमैन को एक प्रशंसक ने यह बताया कि उनकी नई किताब उसने पढ़ी है। फ्रीडमैन को यह सुनकर झटका लगा, क्योंकि 2018 के बाद से उन्होंने कोई किताब लिखी ही नहीं है।

उन्होंने अमेजन, गुड्रेड्स समेत अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पड़ताल की, तो पता चला कि 8 ऐसी किताबें उपलब्ध हैं, जिसमें उनके नाम का इस्तेमाल किया गया है। जबकि इसे उन्होंने लिखा ही नहीं है। ये सभी किताबें AI जनरेटेड हैं।

इससे निपटने कानून नहीं

AI लेखकों की भाषा और शैली को भी कॉपी करता है। फ्रीडमैन ने पाया कि अन्य लेखकों के नाम का भी इसी तरह से दुरुपयोग किया गया है और धड़ल्ले से नकली किताबें बेची जा रही हैं। इससे निपटने के लिए कोई कानून नहीं है।

असली और नकली में फर्क करना मुश्किल

AI भाषा, शैली और रचना प्रक्रिया हू-ब-हू कॉपी करता है। इससे फर्क करना मुश्किल है। फ्रीडमैन ने अमेजन से अपने नाम की नकली किताबें हटाने के लिए कहा, तो अमेजन ने उनके नाम का ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन नंबर मांगा। कानूनी कार्रवाई के लिए यह जरूरी है।

10 हजार से अिधक लेखकों ने रॉयल्टी मांगी

एआई लेखकों की शैली में बड़ी मात्रा में पाठ तैयार कर सकते हैं। इससे निपटने के लिए 10,000 से अधिक लेखकों के ऑथर्स गिल्ड ने चिट्ठी लिखी है। इसमें एआई टूल्स के जरिए रचनाओं की नकल करने के लिए रॉयल्टी और सहमति लेने की मांग की गई है।

AI किताब पर कई सवाल उठे

कॉपीराइट का उल्लंघन, कानूनी कार्रवाई मुश्किल।

बौद्धिक संपदा कानून का पालन भी कठिन हुआ।

धोखाधड़ी की पहचान करने के लिए जरूरी तंत्र नहीं।

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लॉस एंजिल्स में नेटफ्लिक्स के दफ्तर के सामने 1.71 लाख से ज्यादा राइटर्स और एक्टर्स प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से उन्हें काम नहीं मिल रहा है। उनकी कमाई घट गई है।