आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ‘AI साइंस के जरिए खोजी गई सबसे ट्रांसफॉर्मेटिव टेक्नोलॉजी है। यह नए अवसर दे रही है। इंसान की तुलना में 100 गुना ज्यादा काम कर सकती है लेकिन इंसानों की इंटेलिजेंस और क्रिएटिविटी को कभी लांघ नहीं पाएगी…’ यह कहना है OpenAI के CEO और AI चैटबॉट ‘ChatGPT’ के क्रिएटर सैम ऑल्टमैन का। वे गुरुवार को दिल्ली के IIT में स्टूडेंट्स और फैकल्टी से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने AI से गढ़े जा रहे तथ्यों, रेगुलेशन और जॉब को AI प्रूफ कैसे बनाएं… जैसी चिंताओं का समाधान किया, जानिए विस्तार से…
ऑटोमेशन से नौकरी की सुरक्षा: इसके लिए मेटा स्किल्स पर फोकस करना होगा। इन्हें ट्रांसफरेबल या सॉफ्ट स्किल्स भी कहते हैं। AI बेस्ड लैंडस्केप में यह प्रोफेशनल सक्सेस का आधार हैं। ये टेक्निकल कॉम्पिटेंस से परे होते हैं। इनकी जरूरत इंडस्ट्री को हमेशा रहती है। क्रिटिकल थिंकिंग, कम्युनिकेशन, प्रॉब्लम सॉल्विंग , कंपैटिबिलिटी, क्रिएटिविटी, लीडरशिप, इमोशनल इंटेलिजेंस जैसे स्किल इसी श्रेणी में आते हैं। AI स्पेसिफिक टास्क और प्रोसीजर को खुद से कर सकता है।
ChatGPT की रिलायबिलिटी : भले ही दुनियाभर में इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल यूजर्स लेटर लिखने, इमेज बनाने और कई नए-नए सवालों का जवाब पूछने में करते हैं। पर मुझे इस पर पूरी तरह भरोसा नहीं है। इसकी तुलना में किसी इंसान द्वारा दिए गए जवाब पर ज्यादा भरोसा है। मुझे लगता है कि यह धरती पर सबसे कम भरोसेमंद है।
AI का प्रभाव : AI इंसानी प्रोडक्टिविटी को 100 गुना कर देगा, लेकिन इंसानो की क्रिएटिविटी को कभी नहीं हरा पाएगा। AI मॉडल्स चीजें गढ़ते हैं और उन्हें तथ्यों के रूप में पेश करते हैं। अपने मॉडल को दुरुस्त करने में हमें अभी एक साल का वक्त और लगेगा। क्रिएटिविटी और एक्यूरेसी के बीच संतुलन की जरूरत है, हम इस समस्या को कम से कम करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
AI पर रेगुलेशन : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए नियम बनाने जरूरी हैं। मैं अमेरिकी सरकार से भी इसकी वकालत कर चुका हूं। भले अभी के लिए छोटी कंपनियों और डेवलपर्स को इसके दायरे में नहीं रखा जाए, मगर बड़ी कंपनियों में इसके इस्तेमाल के लिए ऐसी सख्ती करनी बहुत जरूरी है। AI डेवलपर्स इस खतरे को सबसे ज्यादा समझते हैं। इसलिए रेगुलेशन की मांग भी सबसे ज्यादा वही कर रहे हैं।
नए मौके : AI निश्चित रूप से काम की प्रकृति को बदल देगा। साथ ही नए मौके भी देगा। AI की क्षमता को कॉप्लिमेंट्री टूल के रूप में भी ले सकते हैं जो हमारी क्षमताएं बढ़ाने में मदद करेगा।
OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने गुरुवार (8 जून) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। IIT दिल्ली में डिजिटल इंडिया डायलॉग्स इवेंट में सैम ऑल्टमैन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ मीटिंग काफी अच्छी रही, वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर काफी उत्साहित थे।