आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: भारत के मोस्ट वांटेड इनामी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर ब्लेम गेम खेल कर इंटरनेशल स्तर पर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहा कनाडा आतंकियों-गैंगस्टरों की सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। पंजाब में वारदात कर आतंकी-गैंगस्टर पहले पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की तरफ भागते थे, लेकिन अब फर्जी दस्तावेजों के दम पर सीधे कनाडा की फ्लाइट पकड़ रहे हैं।
कनाडा में बैठे भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों और गैंगस्टरों के प्रत्यर्पण के लिए भारत सरकार की एजेंसियां पिछले 10 सालों में 26 बार रिक्वेस्ट भेज चुकी हैं, लेकिन कनाडा ने भारत की एक भी रिक्वेस्ट पर गौर नहीं फरमाया। कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार जिसे खालिस्तानियों की ही पार्टी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) समर्थन प्राप्त है खालिस्तानियों के प्रभाव में इतनी है कि उसने प्रत्यर्पण को लेकर चर्चा तक नहीं की।
खालिस्तानियों पर लागू नहीं होता वहां का कोई कानून
कनाडा में हेट स्पीच (घृणा पैदा करने वाला बयान) या ऐसी गतिविधियां जिससे आतंकवाद को बढ़ावा मिलता हो के लिए साल 2015 में कानून बनाया गया था। जिसमें हेट स्पीच या आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने वालों की तुरंत गिरफ्तारी के आदेश थे।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस कानून के तहत भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने और कनाडा में हेट स्पीच देकर हिंदुओं को देश छोड़ने की धमकी देने वाले किसी भी खालिस्तान समर्थक के खिलाफ अभी तक एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है और न ही किसी की इस कानून के तहत कोई गिरफ्तारी हुई है। खालिस्तान समर्थकों को कानून में पूरी छूट मिली हुई है।
2018 में चंद घंटों में ही छोड़ दिया था निज्जर
भारत सरकार ने कनाडा सरकार को शिकायत भेजी थी कि हरदीप सिंह निज्जर भारत के खिलाफ आतंकी साजिशें रच रहा है और पैराग्लाइडर से हथियार आदि भारत में भेजने की फिराक में है। इस पर नजर रखी जाए, लेकिन कनाडा सरकार ने कुछ नहीं किया। इसके बाद भारत ने दोबारा 1987 में दोनों देशों की संधि का हवाला देते हुए दबाव बनाया कि कनाडा की रॉयल कानाडियन माउंटेड पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
लेकिन उसी वक्त सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू जो कि अपनी एक लॉ फर्म भी चलाता है ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया, लेकिन अचंभित करने वाला यह था कि कनाडा की सरकार ने चंद घंटों में ही हरदीप सिंह निज्जर को रिहा कर दिया। इस पर भारत ने अपना कड़ा इतराज भी जताया था।
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