आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : आज से 9 लाख साल पहले पृथ्वी पर सिर्फ 1,280 लोग बचे थे। जेनेटिक रिसर्च में इसका खुलासा हुआ है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के रिसर्चर्स का कहना है कि करीब 9 लाख 30 हजार साल पहले ऐसी स्थिति बनी थी जिससे इंसानों का अस्तित्व ही नहीं होता।
दरअसल, करीब 9 लाख साल पहले पृथ्वी पर 98 हजार लोग थे। इसके बाद मौसम में हुए बदलाव के कारण इन लोगों की मौत होने लगी। इस स्थिति को ‘बॉटलनेक’ कहा गया। ये ‘बॉटलनेक’ अवधि एक लाख 17 हजार साल तक रही। इस दौरान पृथ्वी पर सिर्फ 1,280 लोग ही बचे थे।
साइंस जर्नल में पब्लिश हुई रिसर्च में कहा गया कि ‘बॉटलनेक’ अवधि की शुरुआत में हमारे 98.7 प्रतिशत पूर्वज खत्म हो गए थे। यानी इनकी संख्या 1,280 बची थी। इससे इंसानों का अस्तित्व खतरे में आ गया था। हालांकि, बॉटलनेक अवधि खत्म होने के बाद जनसंख्या बढ़ी और आज पृथ्वी पर 8 अरब (800 करोड़) से ज्यादा लोग रहते हैं।
रिसर्च की मानें तो ‘बॉटलनेक’ के कारण ही मनुष्यों को दो वंशों में विभाजित किया गया- निएंडरथल और मॉडर्न ह्यूमन। निएंडरथल 40 हजार साल पहले विलुप्त हो गए थे। निएंडरथल मानव होमो वंश का एक विलुप्त मेंबर है। जर्मनी में निएंडर की घाटी में आदिमानव की कुछ हड्डियां प्राप्त हुईं थीं, जिनके आधार पर इनका नाम निएंडरथल मानव रखा गया था। इनका कद अन्य मानवजातियों की अपेक्षा छोटा था। अभी तक की स्टडी से मिली जानकारी के मुताबिक कद 4.5 से 5.5 फिट तक था।
अब सवाल ये उठता है कि क्लाइमेट चेंज से इंसानों का अस्तित्व कैसे खतरे में आया था। आइए इसका जवाब जानते हैं…
रिसर्चर्स के मुताबिक, ‘बॉटलनेक’ अवधि के दौरान मौसम में बहुत तेजी से बदलाव आए। इस बदलाव को मिड-प्लीस्टोसीन ट्रांजिशन कहा गया। इसमें ग्लेशियल पीरियड बढ़ता गया। दूसरे शब्दों में कहें तो ये दौर आइस एज का था। यानी पृथ्वी पर असहनीय ठंडी थी और हवा में नमी कम हो गई थी। ज्यादातर हिस्से सूखे थे। ये स्थिति किसी भी इंसान के सर्वाइवल के लिए काफी मुश्किल थी।
अब जानिए जेनेटिक स्टडी कैसे हुई…
DNA में होने वाले जेनेटिक वेरिएशन की तुलना करके, वैज्ञानिक एंशिएंट पॉपुलेशन (प्राचीन आबादी के लोगों, जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहते थे, इधर-उधर घूमते थे और आपस में जुड़े हुए थे) के वंश का पता लगा सकते हैं। वैज्ञानिक इतिहास के अलग-अलग समय में उन आबादी की संख्या का भी अनुमान लगा सकते हैं।
चीन के रिसर्चर्स ने ह्यूमन इवोल्यूशन को समझने के लिए नया तरीका खोजा। इसे नाम दिया FitCoal यानी Fast Infinitesimal Time Coalescent। इसके जरिए वैज्ञानिक मानव इतिहास (ह्यूमन इवोल्यूशन) को समय के आधार पर बांट सकते हैं। आसानी से समझें तो FitCoal के जरिए सैकड़ों या हजारों साल में हुए बदलावों (इवोल्यूशन) को महीनों में बांटा गया।
वैज्ञानिकों ने धरती पर अलग-अलग कालखंडों में मानव आबादी का अनुमान लगाने के लिए 3000 लोगों के जीनोम से आनुवांशिक आंकड़े जुटाए। इससे पता चला कि 9.30 से 8.13 लाख साल पहले धरती पर करीब 1 लाख इंसान रहा करते थे। धीरे-धीरे ये घटकर 1,280 रह गए। इन्हीं 1,280 लोगों से आज की मानव जाति का विकास हुआ है।
रिसर्चर डॉक्टर ली कहते हैं- FitCoal एक ऐसा टूल या मैथड है, जिसके जरिए हम जिंदा चीजों के बनने और उनमें बदलाव को किसी टाइम फ्रेम में बांटकर देख सकते हैं। ये लिविंग थिंग्स यानी जिंदा चीजें इंसान भी हो सकते हैं और पेड़-पौधे भी।