आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : यदि आपने 6 महीने पहले टॉप ब्लूचिप शेयरों में पैसा लगाया होगा, तो अभी औसतन 13% नुकसान में होंगे। ये स्थिति तब है, जब सेंसेक्स और निफ्टी लाइफ टाइम हाई के करीब हैं। दरअसल, बीते दिसंबर से अब तक निफ्टी 50 में शामिल करीब 40% टॉप शेयरों में गिरावट आई है।
13 दिसंबर 2022 को निफ्टी 18,608 पर था। सोमवार को यह 18,601 पर बंद हुआ। इस बीच इन्फोसिस के शेयर सबसे ऊंचे लेवल से 30% तक टूटे हैं, हालांकि क्लोजिंग लेवल का अंतर 17.78% रहा। इसी तरह TCS के शेयरों में हाई लेवल से 28% तक गिरावट आई और बीते 6 महीनों में इसके क्लोजिंग लेवल का अंतर 2.51% है। इस बीच अदाणी ग्रुप, रिलायंस, टाटा स्टील, सरकारी बैंक के शेयर 10-43% टूट चुके हैं।
अदाणी ग्रुप और सरकारी बैंकों के शेयरों में औसत गिरावट, सोर्स: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज
इन दिनों बड़े शेयरों से निकलकर मझोले शेयरों में जा रहा पैसा
एलकेपी सिक्युरिटीज के रिसर्च हेड एस रंगनाथन ने कहा कि ज्यादातर बड़ी कंपनियों के शेयरों (ब्लूचिप) से पैसा निकलकर मझोले शेयरों (मिडकैप) में जा रहा है। इसके कई कारण रहे…
सालभर अधिकांश ब्लूचिप शेयर स्थिर रहे, कमाई न होने से निवेशकों का मोह भंग हुआ।
रिटेल निवेशक, विदेशी निवेशक और म्यूचुअल फंड्स ने मिडकैप शेयरों में पैसा लगाना शुरू किया।
एकमुश्त पैसा लगाने वाले बड़े निवेशक 1-2 साल में पैसा निकल लेते हैं, ब्लूचिप शेयरों में यही हुआ।
जर्मनी जैसी बड़ी इकोनॉमी में मंदी आ रही है, ऐसे देशों से बड़ी कंपनियों को ज्यादा आय होती है।
सेंसेक्स रिकॉर्ड हाई से सिर्फ 559 अंक नीचे
शेयर बाजार में सोमवार को मामूली तेजी रही। सेंसेक्स 99 अंक चढ़कर 62,725 पर बंद हुआ। यह लेवल लाइफ टाइम हाई से सिर्फ 559 अंक नीचे है। 1 दिसंबर, 2022 को सेंसेक्स 63,284 के रिकॉर्ड लेवल पर बंद हुआ था। बहरहाल, निफ्टी 38 अंक चढ़कर 18,601.5 पर बंद हुआ।
क्या हैं ब्लूचिप शेयर?
ब्लूचिप शेयर से मतलब उन कंपनियों के शेयर्स से है जिनका आकार बहुत बड़ा होता है, और इनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इन कंपनियों में रिलायंस, SBI, अडाणी एंटरप्राइजेज, TCS, ITC, HUL, विप्रो और मारुति सहित अन्य कंपनियों के शेयर शामिल हैं। माना जाता कि इन कंपनियों के शेयरों में उतार चढ़ाव कम होता है, इसलिए इनमें पैसा लगाने पर नुकसान की संभवना, विशेषतौर पर लंबे समय में कम ही रहती है।