आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अमेरिका में 10 अगस्त को 35 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ती हुए एक कॉमर्शियल फ्लाइट में केबिन प्रेशर अचानक घट गया। इससे यात्रियों को सांस लेने में मुश्किल होने लगी। प्रेशर ड्रॉप होते ही प्लेन में लगे ऑक्सीजन मास्क नीचे आ गए। इसके बाद पायलट प्लेन को महज तीन मिनट में 15 हजार फीट नीचे लेकर आया।

फॉक्स 35 न्यूज ने फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि फ्लाइट में केबिन प्रेशर कम हो गया था। ईगल एयरलाइन की फ्लाइट फ्लाइट 5916 में पैसेंजर्स को जलने की गंध और तेज आवाज आई। साथ ही लोगों में अफरातफरी मच गई। एयरलाइन ने इस परेशानी के लिए लोगों से माफी मांगी है।

अब विमान के अंदर की तस्वीरें देखिए…

यात्रियों को प्लेन में जलने की बदबू और तेज आवाज हुई

इस विमान में फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैरिसन होव भी सवार थे। उन्होंने घटना के फोटो और अपना अनुभव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर शेयर किया। प्रोफेसर होव ने फोटोज शेयर कर लिखा, ‘यह बेहद डरा देने वाली घटना थी। तस्वीरों में जलने की बदबू और तेज आवाज कैप्चर नहीं हो सकी। मैंने कई बार हवाई यात्रा की है, लेकिन यह एक्सपीरिएंस बहुत खराब था।उड़ान के बीच जैसे कुछ फेल हो गया था।

केबिन पर दबाव कम हो गया था। लोग ऑक्सीजन मास्क से सांस ले रहे थे। इसके बाद विंग फ्लैप तुरंत बाहर निकाले गए जिससे हमारी ऊंचाई कम हुई और यात्रियों को ज्यादा ऑक्सीजन मिल सकी।’

उन्होंने अपने ट्वीट में फ्लाइट के पायलट और क्रू का सुरक्षित लैंडिंग के लिए शुक्रिया भी किया।

11 मिनट में 20 हजार फीट तक नीचे आया विमान

फ्लाइट अवेयर की ओर से शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक, प्लेन 11 मिनट के अंदर करीब 20 हजार फीट तक नीचे आ गया था। 43 मिनट की यात्रा के बाद प्लेन छह मिनट से भी कम समय में 18,600 फीट नीचे आ गया था।

केबिन प्रेशर क्या होता है…

USA टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक कमर्शियल प्लेन 33 हजार से 42 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं। ये माउंट एवरेस्ट से भी ऊपर है, जिसकी ऊंचाई 29,030 फीट है। यही वजह है कि प्लेन में प्रेशर केबिन होता है। इससे ज्यादा ऊंचाई पर ऑक्सीजन लेवल कम होने के चलते लोगों को सांस लेने में परेशानी नहीं होती। आसमान में 33 हजार फीट से ऊपर हवा बेहद ठंडी और पतली होती है। यानी हवा के कण बेहद छोटे होते हैं।

तापमान -56 डिग्री से -69 डिग्री फैरेनहाइट तक होता है। प्लेन के अंदर प्रेशर को सही रखने के लिए उनमें प्रेशराइज्ड हवा छोड़ी जाती है। अब सवाल उठता है कि प्लेन इतनी ऊंचाई पर क्यो उड़ते हैं।

साधारण पैसेंजर प्लेन जिस एरिया में उड़ते हैं उसे लॉवर स्ट्रेटोस्फेयर कहते हैं। ये ड्राई इलाका होने से यहां की हवा में कम नमी होती है। इसकी वजह से बादल भी कम होते हैं। इसी वजह से यहां हवाई जहाजों के लिए उड़ान भरना आसान रहता है।

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