आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ब्रिटेन की एक कंपनी ने सैटेलाइट को टक्कर देने वाला सोलर-इलेक्ट्रिक ड्रोन बनाया है। कंपनी का कहना है कि PHASA-35 नाम का ये ड्रोन सैटेलाइट से बेहतर है और जल्द ही इसकी जगह ले लेगा।
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, PHASA-35 ड्रोन का वजन पांडा के बराबर, यानी सिर्फ 150 किलोग्राम है। वहीं, एक सैटेलाइट का वजन हजारों किलोग्राम होता है। इसे बनाने की लागत भी सैटेलाइट बनाने की लागत की तुलना में काफी कम है।
इस ड्रोन और सैटेलाइट में क्या फर्क है
सैटेलाइट : यह पृथ्वी के वायुमंडल की चौथी परत थर्मोस्फियर में रहता है। यहां ग्रेविटेशनल फोर्स नहीं है, इसलिए यह धरती की कक्षा में घूमता रहता है। इसे बैटरी से एनर्जी मिलती है जो इसमें लगे सोलर पैनल से चार्ज होती हैं। बैटरी की लाइफ खत्म होने पर सैटेलाइट किसी काम का नहीं रह जाता। यह अंतरिक्ष में कचरे के रूप में पड़ा रहता है।
PHASA-35 ड्रोन : यह वायुमंडल की दूसरी परत स्ट्रैटोस्फियर में रहेगा। यहां ग्रेविटेशनल फोर्स है। ऐसे में इसे थामे रखने के लिए इसके पंखों का हमेशा घूमते रहना जरूरी है। इसके पंख ही सोलर पैनल हैं। ये दिन में सूर्य की एनर्जी से घूमते रहेंगे और बैटरी को भी चार्ज करेंगे। रात में बैटरी की एनर्जी से काम करेंगे। एक साल में बैटरी की लाइफ खत्म हो उससे पहले इसे जमीन पर उतार लिया जाएगा।
ड्रोन की खासियत
इसके विंग 115 फीट लंबे हैं। इन्हीं में सोलर पैनल लगे हैं। इस ड्रोन में कमरा, सेंसर, कम्युनिकेशन इक्यिपमेंट्स जैसे 15 किलोग्राम तक के सामान को रखा जा सकता है। ये रिमोट एरिया (जिन इलाकों में इंटरनेट सुविधा नहीं पहुंचती) में 4G और 5G कम्युनिकेशन सर्विस देने में सक्षम है। ड्रोन का वजन काफी कम होने के चलते इस सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के आल्टरनेट की तरह देखा जा रहा है।
पर्यावरण निगरानी और सीमा सुरक्षा में मददगार
स्ट्रैटोस्फियर में रहने की वजह से ये पर्यावरण निगरानी, आपदा राहत, सीमा सुरक्षा, समुद्री और सैन्य निगरानी में मदद कर सकता है। ये लंबे समय तक खुफिया जानकारी देने, मिलिट्री ऑब्जर्वेशन में भी मददगार होगा। इसमें खास तरह के सेंसर्स रखे जा सकते हैं जो स्पेस से जानकारी इकट्ठा करके अलर्ट दे सकते हैं। जैसे- जंगलों की निगरानी करने वाले सेंसर्स। ये पेड़ों की नमी का स्तर मॉनिटर करके फॉरेस्ट फायर का अलर्ट दे सकते हैं।
अब तक दो बार उड़ान भर चुका है ये ड्रोन
PHASA-35 सोलर-इलेक्ट्रिक ड्रोन ने पहली बार 25 जून को उड़ान भरी थी। तब ये अपने मैक्सिमम केपेबल एल्टीट्यूड 70 हजार फीट तक पहुंचा था।