सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : चीन और पाकिस्तान बॉर्डर पर हवाई निगरानी बढ़ाने के लिए 12 नए सर्विलांस विमान तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। ये एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) एयरक्राफ्ट होंगे। इससे चीन और पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन में वायु सेना के फाइटर जेट को मदद मिलेगी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, DRDO और भारतीय वायुसेना 6 AEW&C सिस्टम से लैस मार्क-1 विमान तैयार करेगा। इसके लिए रक्षा मंत्रालय अगले हफ्ते आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) पत्र भी जारी करेगा। वहीं, इसके बाद 6 AEW&C सिस्टम से लैस मार्क-2 विमान तैयार किए जाएंगे।
मार्क-1 AEW&C एयरक्राफ्ट की रेंज 240 डिग्री होगी। वहीं, मार्क-2 एयरक्राफ्ट की रेंज 300 डिग्री तक होगी। मार्क-2 विमान 2026-27 तक तैयार होकर वायुसेना में शामिल होंगे। भारत के पास निगरानी के लिए पहले से ही 3 AEW&C एयरक्राफ्ट है, जिसे NETRA एयरक्राफ्ट भी कहा जाता है।
नए एयरक्राफ्ट की जरूरत क्यों?
भारत फिलहाल पाकिस्तान और चीन से AEW&C के मामले पिछड़ रहा है। हवाई निगरानी के लिए भारत के पास 3 NETRA एयरक्राफ्ट है। इसके अलावा तीन रशियन IL-76 एयरक्राफ्ट है, जिसपर इजराइली फैलकॉन AWAC सिस्टम लगा हुआ है। इन विमानों की रेंज 400 किलोमीटर है और इनका रडार कवरेज 360 डिग्री है। इन्हें 2009-10 में वायु सेना में शामिल किया गया था।
हवाई निगरानी के लिए पाकिस्तान के पास फिलहाल 11 स्वीडिश AEW&C एयरक्राफ्ट और एक चीनी काराकोराम ईगल AWAC एयक्राफ्ट है। वहीं, चीन के पास ऐसे 30 एयरक्राफ्ट हैं। वायुसेना ने निगरानी करने वाले एयरक्राफ्ट की जरूरत सबसे फरवरी 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान महसूस की थी। इसके अलावा पूर्वी लद्दाख में चीन से हुई झड़प के बाद भी वायु सेना उस क्षेत्र में निगरानी बढ़ाना चाहता है।
सर्विलांस शिप INS संधायक नौसेना में शामिल:11 हजार किलोमीटर रेंज; बोफोर्स गन और चेतक हेलिकॉप्टर से लैस
भारतीय नौसेना का सर्विलांस जहाज INS संधायक शनिवार (3 फरवरी) को आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में कमीशन हुआ। इससे नेवी का समुद्री नेवीगेशन और भी बेहतर होगा। यह जहाज 11 हजार किमी की रेंज तक बंदरगाहों और समुद्री तटों की निगरानी कर सकता है। सर्विलांस के अलावा इस जहाज में बोफोर्स गन और चेतक हेलिकॉप्टर की तैनाती भी की जा सकती है। इसे 5 दिसंबर 2021 को लॉन्च किया गया था और 4 दिसंबर 2023 को नेवी को सौंपा गया था।
वायु सेना हवा के साथ अब स्पेस में भी: IAF ने नए नाम और काम का प्रस्ताव डिफेंस मिनिस्ट्री को भेजा, स्पेस डॉक्ट्रिन पहले से तैयार
इंडियन एयर फोर्स (IAF) ने हवा के साथ-साथ स्पेस में भी ताकत जुटानी शुरू कर दी है। IAF अब स्पेस के सिविल और मिलिट्री दोनों पहलुओं का उपयोग करने के लिए विचार कर रही है, जिसके लिए उसने इंफ्रास्ट्रक्चर और थिओरेटिकल फ्रेमवर्क तैयार किया है। इस नए रोल के लिए IAF ने अपना नाम भी तय कर लिया है- इंडियन एयर एंड स्पेस फोर्स।