आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारतीय सेना भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर फोकस कर रही है। इसलिए उसने पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान से विपरीत हालात में मुकाबले के लिए जम्मू-कश्मीर के नॉर्थ और वेस्ट बॉर्डर पर स्वदेशी ड्रोन तैनात किए हैं।

उधर, बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन पूर्वी लद्दाख के स्ट्रैटेजिक न्योमा बेल्ट में 218 करोड़ की लागत से एयरफील्ड बनाएगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह 12 सितंबर को इसकी आधारशिला रखने वाले हैं।

ASMI जैसे हथियार भी खरीदेगी सेना

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक नॉर्दन कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने कहा कि दुश्मन का मुकाबला करने या निगरानी करने के लिए हमारी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर हाईटेक ड्रोन तैनात किए गए हैं। इन्हें देश में ही बनाया गया है। लॉजिस्टिक ड्रोन और ऑटोनॉमस व्हीकल्स को लेकर काफी रिसर्च हुआ है।

सेनगुप्ता ने कहा- हम लॉजिस्टिक ड्रोन का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इनको लेकर अलग-अलग चुनौतियां हैं। हम ऑपरेशनल एंड पर लॉजिस्टिक ड्रोन से ऊंचाई वाले इलाकों में बनी चौकियों तक वजन ले जा सकेंगे।

नॉर्दन कमांड के मेजर जनरल (जनरल स्टाफ) एसबीके सिंह ने कहा कि सेना ने खरीद के लिए कुछ हथियारों की पहचान भी की है। उनमें से एक को ASMI के नाम से जाना जाता है। यह 2 हथियारों का कॉम्बिनेशन है। हम इसे इस बार सिम्पोजियम में प्रदर्शित करेंगे।

क्या है न्योमा स्ट्रैटेजिक बेल्ट

13,400 फीट की ऊंचाई पर बना न्योमा, LAC लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से लगभग 46 किलोमीटर दूर है। न्योमा एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड का इस्तेमाल 2020 से चीन के साथ चल रहे विवाद के दौरान जवानों और रसद लाने-ले जाने के लिए किया गया था। इसमें चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर और C-130J स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट ऑपरेट किया गया था। न्योमा बेल्ट को 218 करोड़ की लागत से डेवलप किया जाना है।

इस एयरफील्ड के बनने से लद्दाख में बेसिक एयर इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही उत्तरी सीमाओं पर IAF (भारतीय वायु सेना) की क्षमता में वृद्धि होगी।

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चीन बॉर्डर पर तीनों भारतीय सेनाओं का युद्धाभ्यास

भारतीय वायुसेना ने थलसेना और नौसेना के साथ चीन बॉर्डर से लगे सिक्किम के हाई ऑल्टीट्यूड एरिया में हेलोकास्टिंग और डाइविंग एक्सरसाइज की। यह कॉम्बैट ट्रेनिंग सिक्किम जैसे दूर-दराज वाले इलाकों में युद्ध जैसे हालात बनने पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में जवानों की मदद करती है।