आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर नेशनल सीक्रेट (साइफर या डिप्लोमैटिक नोट) चोरी करने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। पाकिस्तान के अखबार ‘द डॉन’ के मुताबिक- मामले की जांच स्पेशल जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम कर रही है। इसने अटक जेल में 12 दिन से कैद खान से बुधवार को पांच घंटे पूछताछ की।

यह साइफर पिछले साल मार्च में अमेरिका में तैनात पाकिस्तानी एम्बेसेडर असद मजीद खान ने विदेश मंत्रालय को भेजा था। खान ने इसे पढ़ने के बहाने अपने पास रख लिया और बाद में कहा कि यह लेटर खो गया है। यह नेशनल सीक्रेसी एक्ट के खिलाफ है। अगर खान दोषी पाए गए तो उन्हें 10 साल तक की सजा हो सकती है।

इस केस में नहीं बच सकेंगे इमरान

‘साइफर गेट या केबल गेट या नेशनल सीक्रेट गेट’ केस में इमरान का फंसना तय माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि जब वो प्रधानमंत्री थे, तब आजम खान उनके चीफ सेक्रेटरी थे। आजम से जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम (JIT) दो बार पूछताछ कर चुकी है। आजम ने बिल्कुल साफ कहा है कि उन्होंने यह साइफर इमरान को दिया था। बाद में आजम ने जब इसे खान से वापस मांगा तो उन्होंने कहा कि यह तो कहीं गुम हो गया है।

हैरानी की बात है कि खान ने बाद में यही साइफर कई रैलियों में खुलेआम लहराया। खान ने कहा- ये वो सबूत है जो यह साबित करता है कि मेरी सरकार अमेरिका के इशारे पर फौज ने गिराई। आजम के इकबालिया बयान ने यह तय कर दिया है कि इमरान चाहकर भी इसे झुठला नहीं सकेंगे। खास बात यह भी है कि आजम ने अपना बयान जांच एजेंसी और मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया है। इसकी कॉपी पर सिग्नेचर भी किए हैं।

इसके अलावा खान का एक ऑडियो टेप भी वायरल हुआ था। इसमें इमरान, उस वक्त के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और आजम खान की आवाजें थीं। फोरेंसिक जांच में यह साबित हो चुका है कि यह ऑडियो सही है, इससे कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी। टेप में खान कुरैशी और आजम से कहते हैं- अब हम इस साइफर को रैलियों में दिखाकर इससे खेलेंगे।

साइफर गेट को तफ्सील से समझें

पिछले साल अप्रैल में सरकार गिरने के बाद इमरान की तरफ से लगातार दावा किया गया कि यह लेटर (डिप्लोमैटिक टर्म में सायफर) अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट यानी फॉरेन मिनिस्ट्री की तरफ से पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को भेजा गया। इमरान का दावा रहा कि बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन उनको प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नहीं देखना चाहती थी और अमेरिका के इशारे पर ही उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था।

सबसे जरूरी यह जानना है कि इमरान जो कागज दिखा रहे था, वो वास्तव में है क्या। पाकिस्तान के सीनियर जर्नलिस्ट रिजवान रजी के मुताबिक- यह कागज झूठ के सिवाए कुछ नहीं था। कुछ महीनों पहले तक अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत थे असद मजीद। उनके बारे में ये जानना बेहद जरूरी है कि वो इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ के सदस्य और इमरान के खास दोस्त थे।