आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/ आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: महाराष्ट्र के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत पाटिल ने शिवसेना को लेकर बयान दिया है कि अयोध्या में जब 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराई गई तब वहां केवल बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी के कार्यकर्ता थे। वहां बाला साहेब या शिवसेना का एक भी कार्यकर्ता मौजूद नहीं था।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक एकनाथ शिंदे सरकार में हायर एजुकेशन मिनिस्टर और महाराष्ट्र भाजपा के पूर्व प्रमुख पाटिल ने एक लोकल न्यूज चैनल से बात करते हुए यह बयान दिया।

संयोग से शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे को भी अक्सर यह कहते हुए सुना गया कि अगर उनके किसी सैनिक ने विवादित बाबरी ढांचे के विध्वंस में भाग लिया होता तो उन्हें गर्व होता।

पाटिल बोले- मुझे बजरंग दल ने 4 महीने के लिए वहां रखा था

पाटिल ने दावा किया कि बिहार राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम और वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी, विधायक हरेंद्र कुमार और उन्हें कारसेवकों का मैनेजमेंट करने और उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने का काम दिया गया था। पाटिल बोले- “हम तीनों वहां राष्ट्रीय महासचिव के रूप में काम कर रहे थे। RSS की ताकत हमारे पीछे थी, लेकिन इसने खुलकर भाग नहीं लिया। इसने अपना काम समान विचारधारा वाले संगठनों को बांट दिया था। विध्वंस में भाग लेने वाले लोग या तो बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद या दुर्गा वाहिनी से थे।

पाटिल ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘ढांचा गिरने के बाद स्वर्गीय बाला साहेब ने कहा कि मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं, लेकिन क्या उन्होंने अपने चार सरदार भेजे थे?’

बाला साहेब हिंदुओं की संपत्ति, कोई भी उनका नाम इस्तेमाल कर सकता है

पाटिल ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर बाल ठाकरे की विरासत को चुराने का आरोप लगाने के लिए उद्धव ठाकरे पर भी कटाक्ष किया। पाटिल ने कहा कि दिवंगत शिवसेना संस्थापक किसी की संपत्ति नहीं थे और वह ऐसे व्यक्ति थे जिनका लोग बहुत सम्मान करते थे। पाटिल ने कहा, “बालासाहेब सभी हिंदुओं की संपत्ति हैं और हर कोई उनके नाम (विरासत) का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र है।”

गौरतलब है कि शिवसेना जून 2022 में शिंदे की बगावत के बाद विभाजित हो गई। पार्टी का नाम और निशान तीर कमान शिंदे गुट को मिला, जबकि उद्धव ठाकरे के गुट को शिवसेना (यूबीटी) का नाम दिया गया, जिसका निशान जलती हुई मशाल थी।