आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मणिपुर मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे से नाराज हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला आज (3 अगस्त) भी सदन नहीं आए। उनकी जगह राजेंद्र अग्रवाल ने सदन की अध्यक्षता की।

इसे लेकर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने नए स्पीकर से अनुरोध किया कि वे ओम बिड़ला को सदन वापस आने को मनाएं। उन्होंने कहा कि बिड़ला हमारे संरक्षक हैं।

राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने सभी सांसदों को 1 बजे मणिपुर पर चर्चा करने का निमंत्रण दिया। बुधवार को विपक्ष ने इस मामले पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी।

आज संसद के मानसून सत्र का 11वां दिन है। आज लोकसभा में दिल्ली अध्यादेश बिल पर चर्चा हो सकती है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल भी पेश होगा।

राज्यसभा स्पीकर धनखड़ बोले- मैं PM का नहीं, संविधान का बचाव करने बैठा हूं

मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा स्पीकर जगदीप धनखड़ से पूछा कि वे मणिपुर मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर PM का बचाव क्यों कर रहे हैं। इसके जवाब में धनखड़ ने कहा, ‘मुझे PM का बचाव करने की जरूरत नहीं है। मैं यहां किसी व्यक्ति का बचाव करने नहीं बैठा हूं। मैं यहां संविधान और आपके अधिकारों का बचाव करने बैठा हूं। आपकी तरफ से ऐसी बात सराहनीय नहीं है।’

बुधवार को स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठे थे ओम बिड़ला

2 अगस्त को लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला अपनी कुर्सी पर नहीं बैठे। वे लोकसभा में विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे से नाराज थे, इसलिए उन्होंने सदन आने से इनकार कर दिया। उनकी जगह आंध्र प्रदेश के राजमपेट से सांसद पीवी मिधुन रेड्‌डी ने लोकसभा की कार्यवाही संभाली।

02 अगस्त को राज्यसभा में ये बिल पास हुए

  1. माइन्स और मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) बिल : इस बिल में प्राइवेट सेक्टर को लिथियम सहित 12 परमाणु खनिजों में से छह और सोने-चांदी के खनन की अनुमति देने का प्रोनिजन है। बिल केंद्रीय कोयला और खान मंत्री प्रल्हाद जोशी ने पेश किया था। लोकसभा इसे पिछले महीने ही पास कर चुकी है।
  2. फॉरेस्ट (कंजर्वेशन) अमेडमेंट बिल 2023 : इस बिल में देश की सीमाओं के 100 किमी के भीतर की जमीन को संरक्षण कानूनों से छूट मिल जाएगी। इस जमीन पर अब जू, सफारी और इको टूरिज्म सुविधाएं शुरू की जा सकेंगी। यह बिल भी पिछले महीने लोकसभा से पास हो गया था।
  3. जन विश्वास ( अमेंडमेंट ऑफ प्रोविजन्स) बिल: ये बिल छोटे अपराधों में अपराध मुक्त करके व्यापार में आसानी को बढ़ावा देना है। बिल से 19 मंत्रालयों के तहत 42 अधिनियमों के 183 प्रावधानों में बदलाव किया गया है। बिल से कई फाइन को पेनल्टी में बदल दिया जाएगा जिससे कोर्ट में मुकदमा चलाना जरूरी नहीं होगा।