आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रूस ने हाइपरसोनिक मिसाइल की टेक्नॉलोजी पर काम करने वाले अपने 3 वैज्ञानिकों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा शुरू कर दिया है। इन तीनों पर चीन को मिसाइल टेक्नोलोजी से जुड़ी गुप्त जानकारी देने के आरोप लगाए गए हैं। तीनों साइबेरियाई शहर नोवोसिबिर्स्क में एक संस्थान में काम करते थे।
पहले वैज्ञानिक अनातोली को गुरुवार के दिन सुनवाई के लिए रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में लाया गया। उनकी कस्टडी को 10 नवंबर तक बढ़ाया गया है। ट्रायल की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। मीडिया को भी इससे दूर रखा गया है। वहीं, वैज्ञानिकों के वकीलों को भी कुछ भी कहने से इनकार किया गया है। तीनों को पिछले साल जून में गिरफ्तार किया गया था। तब से 76 साल के अनातोली को 2 बार हार्ट अटैक आ चुका है। उनकी तबीयत लगातार खराब रहती है।
नेक्स्ट जनरेशन मिसाइलों पर काम कर रहे थे वैज्ञानिक
रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने बयान जारी कर बताया है कि तीनों वैज्ञानिकों (अनातोली, अलेक्जेंडर और वैलेरी) के खिलाफ आरोप बहुत गंभीर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों वैज्ञानिकों पर 2017 में चीन में हुई एक कॉन्फ्रेंस में मिसाइलों के सीक्रेट्स बेचने के आरोप लगे हैं। सेंट पीटर्सबर्ग कोर्ट ने इस ट्रायल को टॉप सीक्रेट घोषित किया है। मास्लोव रूस के टॉप साइंस इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर और शोधकर्ता थे। तीनों वैज्ञानिक हाइपरसोनिक मिसाइल विशेषज्ञ हैं।
ये रूस की नेक्स्ट जनरेशन की मिसाइलों पर काम कर रहे थे। ये मिसाइलें स्पीड ऑफ साउंड से 10 गुना तेजी से उड़ सकती हैं। तीनों वैज्ञानिकों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। वैज्ञानिकों का ट्रायल शुरू होने से 2 महीने पहले रूस की संसद ने अप्रैल में देशद्रोह के लिए मिलने वाली सजा को बढ़ाकर 20 साल से आजीवन कारावास करने के लिए वोटिंग की थी।
यूक्रेन एक के बाद एक तबाह कर रहा रूसी मिसाइलें
रूस में वैज्ञानिकों का ट्रायल उस समय हो रहा है जब यूक्रेन एक के बाद एक रूसी मिसाइलें तबाह करने के दावे कर रहा है। इसी हफ्ते यूक्रेन ने बताया था कि उन्होंने रूस की 6 हाइपर सोनिक मिसाइलों को एक रात में ढेर किया है। इनमें रूस की किंजल मिसाइल भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘किंजल’ स्पीड ऑफ साउंड से भी 5 गुना तेजी से ट्रैवल करती है। इसकी रेंज 1200 मील की है।
दरअसल, अब तक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन दावा करते आए हैं कि वो हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में वर्ल्ड लीडर हैं। ऐसे में लगातार मिसाइलों का फेल होना उनके दावे पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।