आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मौसम विभाग (IMD) के वैज्ञानिक डॉ. डीएस पई शुक्रवार दोपहर 12 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इसमें वह जून में मानसून की स्थिति की बारे में बताएंगे। इसके अलावा वे अल नीनो के बारे में भी जानकारी देंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मानसून इस बार 4 से 5 दिन लेट हो सकता है। 4 सवालों में समझें भारत में सूखा कैसे घोषित होता है…
- क्या 2023 में भी 2015 की तरह कम बारिश होगी?
7 साल पहले 2015 में देश में जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून से होने वाली कुल बरसात का आंकड़ा 90% से कम आ गया था। दीर्घकालीन औसत (एलपीए) 87.3% रहा था। इसलिए आखिरी बार 2015 को आधिकारिक रूप से कम वर्षा वाला वर्ष घोषित किया गया था। 2019, 2020, 2021 और 2022 में सामान्य से ज्यादा बरसात हुई थी।
अब 4 साल के बाद 2023 के अलग रहने के अनुमान है। खतरनाक अल नीनो इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून से टकराने वाला है। जिससे देशभर में वर्षा में कमी और पैटर्न के भी प्रभावित होने की उम्मीद हैं। अभी ये मामला अधर में है। आने वाले दिनों में सही उत्तर मिलेगा।
विशाल देश होने के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि देश की कृषि योग्य भूमि का 56% हिस्सा बारिश पर निर्भर है। जो कुल खाद्यान्न उत्पादन का 44% हिस्सा पैदा करता है। देश की कुल बरसात का 73% जून से सितंबर के बीच में होती है।
- सूखा कितनी तरह का होता है?
सामान्य तौर पर सूखा तीन तरह का होता है।
मौसम आधारित सूखा (मेटरियोलॉजिकल): जब बारिश की कमी पर निर्भर होता है।
जलीय सूखा (हाइड्रोलॉजिकल): जब सतह और उपसतह पर पानी की सप्लाई प्रभावित होती है। जिससे सिंचाई के पानी की व्यवस्था नहीं हो पाती है।
कृषि सूखा (एग्रीकल्चरल): जब लगातार चार सप्ताह तक बारिश की कमी हो तो उसे कृषि सूखा कहते हैं। कृषि क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा मार इसी की पड़ती है।
- अखिल भारतीय सूखा वर्ष क्या है?
मौसम विभाग के अनुसार जिस वर्ष देश में बारिश की कमी 10% हो तो उसे सूखा वर्ष माना जाता है। इसके अलावा, जिस साल देश के 20 से 40% हिस्से में 10% कम बारिश होती है तो उसे अखिल भारतीय सूखा वर्ष माना जाता है। जिस साल देश के 40% से ज्यादा हिस्से में 10% से कम वर्षा हो तो वह अखिल भारतीय गंभीर सूखा वर्ष होता है।
- सूखा प्रबंधन में किसकी भूमिका अहम है?
सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सबसे पहला रेस्पांस राज्य सरकारों को करना होता है। राज्य सरकारों की रिपोर्ट के आधार पर ही कम या ज्यादा बारिश होने पर किसानों का सहायता मिलती है। सूखे की स्थिति में राज्य सरकारों को केंद्र सरकार वित्तीय सहायता मुहैया कराती है। इसमें एसडीआरएफ और एनडीआरएफ भी मदद करती है।
जून शुरू होने वाला है। लोगों को बेसब्री से मानसून का इंतजार है। मौसम विभाग का कहना है कि पिछले एक हफ्ते से दक्षिण-पश्चिम मानसून एक ही जगह अटका है। इसके 4 दिन देरी से केरल पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में कम बारिश की चिंता के साथ सूखे पर कई सवाल हैं।