आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : खून में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक से दिमाग में सूजन और जलन हो सकती है। साइंस अलर्ट न्यूज के मुताबिक, साइंटिस्ट्स का कहना है कि माइक्रोप्लास्टिक ब्लड ब्रेन बैरियर को तोड़ते हुए दिमाग को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे ब्रेन सेल्स मर भी सकते हैं।

ब्लड ब्रेन बैरियर एक झिल्लीनुमा संरचना होती है, जो खून के साथ आने वाले अवांछित पदार्थों (अनवॉन्टेड सबस्टेंस) को दिमाग में घुसने से रोकती है। ये संरचना एंडोथेलियल कोशिकाओं की होती है। माइक्रोप्लास्टिक इस संरचना को तोड़ते हुए दिमाग में घुस रहे हैं।

एक व्यक्ति हर हफ्ते माइक्रोप्लास्टिक के 1769 कण पानी से ही कंज्यूम कर लेता है

अमेरिका के प्लास्टिक ओशन NGO की मानें, तो औसतन एक व्यक्ति हर हफ्ते माइक्रोप्लास्टिक के 1769 कण सिर्फ पीने के पानी से ही कंज्यूम कर लेता है। एनवायरन्मेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी जर्नल की एक रिसर्च कहती है कि लोग हर साल 39,000 से 52,000 माइक्रोप्लास्टिक के पार्टिकल्स (कणों) को निगल जाते हैं।

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फेडरेशन 2019 की रिपोर्ट में कहा गया कि हर सप्ताह प्लास्टिक के करीब 2000 छोटे कण खाने या सांस के जरिए इंसान के शरीर के अंदर पहुंचते हैं।

माइक्रोप्लास्टिक हमारे खून में कैसे मिलता है…

साइंटिस्ट्स के मुताबिक, खान-पान के जरिए प्लास्टिक के बेहद छोटे कण हमारे लिवर में पहुंचते हैं। जहां से पाचन प्रक्रिया के जरिए ये खून में मिल जाते हैं।

इसके अलावा सांस लेने के दौरान कई बार हवा में मौजूद प्लास्टिक कण हमारे हार्ट तक पहुंच जाता है। जहां लंग्स में फंसे होने की वजह से कई बार ये यहीं से खून में मिल जाता है।

2022 में पहली बार इंसान के खून में मिला था माइक्रोप्लास्टिक

नीदरलैंड्स के साइंटिस्ट्स ने मार्च 2022 में इंसान के खून में प्लास्टिक के टुकड़े ढूंढ निकाले थे। उन्होंने 22 लोगों के ब्लड सैंपल लेकर रिसर्च की थी। इनमें से 17 के खून में प्लास्टिक के पार्टिकल पाए गए।

रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों को इंसानों के खून में 5 तरह के प्लास्टिक मिले हैं। इनमें मुख्य रूप से पॉलीमेथाइल मेथैक्रिलेट (PMMA), पॉलीप्रोपाइलीन (PP), पॉलीस्टाइनिन (PS), पॉलीइथाइलीन (PE), और पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट (PET) शामिल हैं। इसके अलावा 23% लोगों में पॉलीइथाइलीन (PE) मिला, जो प्लास्टिक बैग में पाया जाता है।