आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से मिलने के लिए रूस जाएंगे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस दौरान वो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से यूक्रेन जंग में हथियारों की सप्लाई और सैन्य सहयोग पर बात करेंगे। रूस के दौरे के लिए किम जोंग उन नॉर्थ कोरिया की राजधानी प्योंगयांग से रूस के शहर व्लादिवोस्तोक के लिए हथियारबंद ट्रेन से यात्रा करेंगे।

माना जाता है कि किम हवाई यात्रा से डरते हैं ऐसे में वो ज्यादातर यात्राएं ट्रेन से ही करते हैं। इस ट्रेन को 1949 में किम के दादा किम इल संग को स्तालिन ने गिफ्ट किया था। ये कई डिब्बों वाली इंटर कनेक्टेड ट्रेन है। जब भी किम उत्तर कोरिया या चीन की यात्रा करते हैं तो उनका सारा लावलश्कर इसी ट्रेन में उनके साथ होता है।

ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में हिस्सा लेंगे तानाशाह किम जोंग

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक रूस नॉर्थ कोरिया से ऑर्टिलरी शेल्स और एंटी टैंक मिसाइल चाहता है। इसके बदले में नॉर्थ कोरिया रूस से सैटेलाइट और न्यूक्लियर सबमरीन टेक्नोलॉजी की मांग करेगा। इसके अलावा किम जोंग उन अपने देश के लिए खाद्य सहायता भी चाहते हैं।

दोनों नेता 10 से 13 सितंबर तक चलने वाले ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में भाग लेने के लिए व्लादिवोस्तोक की फार ईस्टर्न फेडरल यूनिवर्सिटी के कैंपस जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक किम जोंग उन रूस के प्रशांत महासागर फ्लीट के नेवल बेस पीएर 33 भी जा सकते है।

बुधवार को व्हाइट हाउस ने पुतिन और किम के बीच होने वाली हथियारों की डील को लेकर चेतावनी दी है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जॉन किरबी ने कहा कि दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत लगातार बढ़ रही है। हालांकि इसके बारे में अधिक जानकारी देने से अधिकारियों ने मना कर दिया। नॉर्थ कोरिया और रूस, अमेरिका के धुर विरोधी देश माने जाते है।

अमेरिका के दबाव में रद्द हुई थी रूस-नॉर्थ कोरिया की डील

अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की प्रवक्ता एड्रीइने वॉटसन ने कहा कि अमेरिका का मानना है कि दोनों नेताओं के बीच हथियारों की बिक्री होने वाली है। हम नॉर्थ कोरिया से कहना चाहते है कि वह रूस से हथियारों की डील को लेकर बातचीत रोक दे।

साथ ही रूस को हथियार न देने या बेचने के अपनी बात पर बने रहे। रूस-यूक्रेन जंग के बीच अमेरिका की कोशिश है कि रूस को हथियारों की सप्लाई न हो पाए। इसके लिए वह लगातार चीन और नॉर्थ कोरिया पर रूस के हथियार न देने के लिए लगातार दबाव बना रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक रूस को हथियार देने की नॉर्थ कोरिया की पिछली डील अमेरिका दबाव के चलते रद्द हो गई थी।