आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कुछ दिन पहले एक व्यक्ति न्यूयॉर्क से लंदन का हवाई सफर कर रहे थे। इसी दौरान पीछे बैठे यात्री ने अपना पैर उनके आर्मरेस्ट पर रख दिया। इससे वे असहज हो गए, धड़कनें बढ़ने लगीं। वे कुछ करते इससे पहले ही उनके बगल में बैठे यात्री ने अपने पेन की निब पीछे वाले यात्री के पैर में चुभा दी। इससे पीछे के यात्री ने तुरंत अपने पैर पीछे हटा लिए।

यह कहानी सुनाकर स्टैनफोर्ड मेडिसिन इंस्टीट्यूट की व्यवहार विशेषज्ञ करेन ओसिला कहती हैं- कुछ लोगों को टकराव के बारे में सोचकर ही तनाव हो जाता है। अक्सर लोग इससे बचते हैं, क्योंकि वे इसे खतरा मानते हैं। पर, ओसिला कहती हैं कि ऐसे विवाद आम बात हैं। संघर्ष से बचने वाले लोग इन स्थितियों से कैसे निपट सकते हैं, जानिए एक्सपर्ट से…

  1. असहमति की शुरुआत भरोसेमंद लोगों से करें

जिन लोगों को टकराव से हमेशा खतरा महसूस होता है, उन्हें की स्थिति से निपटने के लिए भरोसेमंद दोस्त की मदद लेनी चाहिए। गुड आर्ग्युमेंट्स के लेखक बो सेओ कहते हैं, असहमति जताने के लिए मनोवैज्ञानिक सुरक्षा जरूरी है। यह सोचते हुए सहज होने की कोशिश करें कि हम वास्तव में उस बात से सहमत नहीं हैं। इस भावना को दमदारी के साथ जाहिर करें।

  1. बेवजह धारणा बनाने की जगह समाधान सोचें

हार्वर्ड नेगोसिएशन प्रोजेक्ट की डेप्युटी डायरेक्टर शीला हेन कहती हैं, जब भी ऐसी स्थिति में फंसे तो गहरी सांस लें, इससे शांत होने में मदद मिलेगी। इसमें वक्त बर्बाद न करें कि सामने वाला आपके बारे में क्या सोचता है। क्योंकि यह जानना संभव नहीं। एक बार शांत हो जाएं तो सोचें कि इस स्थिति ने आप को कैसे प्रभावित किया है। इसके बाद आपको महसूस होगा कि जिसे समस्या समझ रहे थे, वह दरअसल है ही नहीं।

  1. भावनाओं को दबाकर न रखें, खुलकर साझा करें

लोगों को स्पष्ट रूप से बताएं कि उनकी कौन सी बात आपको चुभी है। हेन कहती हैं, भावनाओं को दबाकर रखेंगे तो वे गुस्से, आक्रामकता, प्रतिवाद में बदल सकती हैं। भावनाओं को दोष देने और हमले में उनका इस्तेमाल करने की बजाय, उन्हें नाम देना बेहतर है। जैसे कोई दोस्त बार-बार नजरअंदाज कर रहा है तो उससे समस्या की वजह पूछें। हो सकता है कि वो किसी मुश्किल में फंसा हो।