दुनिया की सबसे लंबी रिवर क्रूज यात्रा डॉल्फिन को खतरे में डाल सकती है। इस बात को लेकर अभी से ही पर्यावरणविद चिंतित हैं। गंगा डॉल्फिन पर लंबे समय से कार्य कर रहे आरके सिन्हा ( डॉल्फिन मैन ) का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं हैं। क्रूज से डॉल्फिन पर असर पड़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से दुनिया के सबसे लंबे रिवर क्रूज एमवी गंगा विलास को वाराणसी से डिब्रूगढ़ के लिए रवाना किया। यह अल्ट्रा लग्जरी क्रूज भारत के पूर्वी हिस्से और बांग्लादेश की यात्रा करते हुए 51 दिन में एक मार्च 2023 को असम के डिब्रूगढ़ पहुंचेगा। यह क्रूज उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम राज्य से गुजरेगा। 27 नदियों को कवर करते हुए वाराणसी से ढाका होते हुए डिब्रूगढ़ पहुंचेगा। 18 सूइट्स का तीन डेक वाला रिवर क्रूज एमवी गंगा विलास भारत में क्रूज टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नया वेंचर है। हालांकि पर्यावरणविदों का कहना है कि क्रूज से डॉल्फिन को खतरा पहुंच सकता है। बता दें कि डॉल्फिन को गंगा की गाय भी कहा जाता है।

बता दें कि एमवी गंगा विलास जिन मार्गों से गुजरेगा, उन मार्गों पर कई डॉल्फिन के सुरक्षित ठिकाने हैं। उसमें बिहार के विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य भी है। बताया जाता है कि गंगा नदी डॉल्फिन को पहले से ही जल प्रदुषण, अत्याधिक जल निकासी और अवैध तरीके से शिकार सहित कई खतरों का सामना करना पड़ता है। डॉल्फिन मैन से फेमस आरके सिन्हा का कहना है कि डॉल्फिन के लिए सभी मौजूदा खतरों के अलावा क्रूज एक खतरनाक चीज है।

क्रूज से डॉल्फिन को खतरा है: आरके सिन्हा कॉम से बात करते हुए डॉल्फिन मैन ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है, क्रूज से डॉल्फिन को खतरा है। बता दें कि आरके सिन्हा वही शख्स हैं, जिनके संरक्षण प्रयासों ने सरकार को 1990 के दशक में गंगा डॉल्फिन को संरक्षित प्रजाति के रूप में दर्ज करने को मजबूर किया था। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में गंगा में डॉल्फिन की संख्या बढ़ी है। आरके सिन्हा के अनुसार, इस वक्त गंगा में लगभग 3200 डॉल्फिन हैं। हालांकि सिन्हा को डर है कि क्रूज टूरिज्म से इनकी संख्या कम हो सकती है।

आरके सिन्हा का कहना है कि इसमें किसी को शंका नहीं होनी चाहिए। क्रूज से डॉल्फिन प्रभावित होंगे। डॉल्फिन आवाज के प्रति संवेदनशील होते हैं। उन्होंने कहा कि गंगा में रहने वाली डॉल्फिन अंधी होती है। डॉल्फिन इकोलोकेशन क्लिक का प्रयोग कर भोजन की तलाशी करती है। पानी के नीचे ध्वनि प्रदूषण इकोलोकेशन क्लिक में बाधा डाल सकता है। ऐसे में इनका जीवन कठीन हो सकता है।

केंद्र सरकार करा रही डॉल्फिन की गिनती

बता दें कि बिहार की पांच नदियों गंगा, कोसी, सोन, महानंदा और गंडक में डॉल्फिन की गिनती की जा रही है। नमामि गंगे परियोजना के तहत डॉल्फिन की गिनती केंद्र सरकार करा रही है। जानकारी के अनुसार गंगा, कोसी और महानंदा नदियों में गिनती का काम पूरा हो चुका है। गंडक और सोन नदीं में गिनती का काम जारी है। गौरतलब है कि बिहार सरकार ने 2018 में डॉल्फिन की गिनती करवाई थी। उस वक्त प्रदेश में 1464 डॉल्फिन पाए गए थे।

2018 में गंगा नदी में 1048 डॉल्फिन मिले थे

2018 में हुई गिनती के अनुसार, केवल गंगा नदी में 1048 डॉल्फिन पाए गए थे। हालांकि उस वक्त कोसी और महानंदा में इनकी गिनती नहीं हुई थी। उस वक्त के रिपोर्ट के अनुसार, बक्सर से मोकामा के बीच 298, मोकामा से साहिबगंज के बीच 750 डॉल्फिन पाए गए थे। इसमें पटना के गांधी घाट से फतुहा के बीच में 22 डॉल्फिम मिले थे। वहीं, गंडक नदीं में 255 और घाघरा में 161 डॉल्फिन मिले थे। हालांकि क्रूज चलने से पर्यावरणविद अभी से चिंतित हैं और उन्हें आशंका है कि आने वाले समय में डॉल्फिन की संख्या कम हो सकती है।