आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने UN जनरल असेंबली में एक बार फिर से कश्मीर का मुद्दा उठाया है। UNGA के 78वें सेशन में एर्दोगन ने कहा- साउथ एशिया में शांति, स्थिरता और विकास के लिए कश्मीर में न्याय के साथ शांति स्थापित करना बेहद जरूरी है। इसके लिए भारत और पाकिस्तान को बातचीत और सहयोग के जरिए मामला सुलझाना होगा।
एर्दोगन ने कहा- हम कश्मीर में शांति के लिए जो भी कदम उठाए जाएंगे, उसका समर्थन करेंगे। भारत UNSC में एक अहम भूमिका निभा रहा है और ये गर्व की बात है। UNSC के टेमपररी मेंबर्स को भी परमानेंट बनाया जाना चाहिए। तुर्किये के राष्ट्रपति ने कहा- दुनिया 5 देशों से बड़ी है। ये अब सिर्फ अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस की बात नहीं है।
UNHRC में भी उठाया था कश्मीर का मुद्दा
तुर्किये लगातार कश्मीर को लेकर विवादित बयान देता आया है। इससे पहले मार्च में UNHRC की मीटिंग में भी एर्दोगन ने UN रिजॉल्यूशन के जरिए कश्मीर मुद्दा सुलझाने की बात कही थी। इस पर भारत ने तुर्किये को देश के आंतरिक मामलों से दूर रहने को कहा था।
इससे पहले पिछले साल भी UNGA की मीटिंग में तुर्किये ने कश्मीर पर बयान दिया था। तब एर्दोगन ने कहा था- कश्मीर पर 74 साल से समस्या जारी है। हमारा मानना है कि दोनों पक्षों को संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर इसे हल कर लेना चाहिए।
आर्टिकल 370 हटने के बाद तुर्किये ने कहा था- इससे हालात और खराब हुए
2019 में कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद पाकिस्तान ने इसका विरोध किया था। इसमें तुर्किये ने उसका साथ दिया था। 2020 में UNGA की मीटिंग में एर्दोगन ने कहा था- कश्मीर साउथ एशिया के लिए अब भी एक बड़ा मुद्दा है। आर्टिकल 370 हटने की वजह से हालात और खराब हो गए हैं। तुर्किये ने UN रिजॉल्यूशन के तहत मुद्दा सुलझाने की पैरवी की थी।
वहीं 2019 में कश्मीर का जिक्र करते हुए एर्दोगन ने कहा था- इस मुद्दे को संघर्ष नहीं बल्कि बातचीत से सुलझाना जरूरी है, जिससे कश्मीरी लोग अपने पाकिस्तानी और भारतीय पड़ोसियों के साथ मिलकर शांति से रह सकें। एर्दोगन ने ये भी आरोप लगाया था कि क्षेत्र के करीब 80 लाख निवासी नाकाबंदी में हैं। उन्हें कश्मीर से बाहर जाने की इजाजत नहीं दी जारी है।