आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : चीन की चुनौती से निपटने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन के बाद अब एक और देश आगे आ गया है। यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी ने अपनी नई नीति का खुलासा किया है। उसने एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन को ‘साझेदार, प्रतिस्पर्धी और ढांचागत प्रतिद्वंद्वी’ बताया है। जर्मन सरकार ने 64 पन्ने का दस्तावेज जारी करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य जर्मन अर्थव्यवस्था की चीन पर निर्भरता खत्म करना है।

नई नीति में वह चीन के साथ रिसर्च में सहयोग बंद करेगा। उन रिसर्च परियोजनाओं को जर्मन सरकार समर्थन नहीं देगी, जिनसे जर्मनी को बौद्धिक खतरा पैदा हो। साथ ही जर्मन शिक्षाविदों को सहयोग के सुरक्षा जोखिमों के बारे में और जागरूक किया जाएगा। ‘प्रमुख क्षेत्रों’ में चीनी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करने के लिए जर्मनी प्रमुख प्रौद्योगिकियों की लिस्टिंग करेगी। जर्मनी चीन के साथ उन परियोजनाओं से पैसा निकालना चाहता है, जिनमें नॉलेज ट्रांसफर हो सकता है।

अमेरिका ला चुका नीति, ब्रिटेन ने जासूसी रोकने के लिए चीनी कैमरे हटाए

अमेरिका की चीन प्लस वन पॉलिसी

अमेरिका भारत को चीन के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखता है, यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में भारत और अमेरिका के बीच में व्यापार काफी बढ़ गया है। चीन के विकल्प के लिए अमेरिका ने चीन प्लस वन पॉलिसी शुरू की है। इसका उद्देश्य कंपनियों को चीन के बाहर ऑपरेशंस का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करना है। अमेरिका का चीन के प्रति रुख ट्रम्प के कार्यकाल के बाद बदल गया।

ब्रिटिश सुरक्षा के लिए चीन बड़ा खतरा

ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चीन बड़ा खतरा है। चीन अब तक ब्रिटेन को आक्रामकता से निशाना बनाने में सफल रहा है, क्योंकि सरकार की तरफ से इस खतरे से निपटने के लिए बेहतर नीति नहीं है। इस रिपोर्ट से पहले ब्रिटेन ने सरकारी इमारतों से चीन-निर्मित निगरानी कैमरे हटवाए थे, ताकि जासूसी का खतरा कम किया जा सके।

जापान समान सोच वालों को मदद देगा

जापान ने चीन से मुकाबला करने के लिए गत अप्रैल में योजना पेश की है। वह मुख्य रूप से एशिया में समान विचारधारा वाले देशों को सैन्य मदद पेश करेगा, क्योंकि जापान ताइवान और दक्षिण चीन सागर के मुद्दों को लेकर चीन के आक्रामक रुख का मुकाबला करने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने प्रभाव का विस्तार करना चाहता है। जापान का ये कदम उसकी पिछली नीति को तोड़ता है।

ऑस्ट्रेलिया लंबी दूरी के हथियार ले रहा

चीन से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने अपनी सेना में दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अब तक का सबसे बड़ा बदलाव शुरू किया है। वह अब लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता हासिल करने की दिशा में बढ़ गया है। उसने ऑकस (ऑस्ट्रेलिया, UK, US) संधि की घोषणा भी की है। इसके तहत अमेरिका और ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया को परमाणु शक्ति संचालित पनडुब्बियां हासिल करने में मदद करेंगे।