आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ओडिशा के बहानगा रेलवे स्टेशन के पास हुए ट्रिपल ट्रेन हादसे में घायल हुए यात्रियों में से कुछ गहरे सदमे में हैं। कोई नींद में चौंककर उठ जाता है। कोई अनायास ही चीखने लगता है, ताे कुछ लोग हंसने लगते हैं। कुछ फूट-फूट कर रोने लगते हैं। कुछ की नींद ही गायब है।
ये घायल यात्री ओडिशा के कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती हैं। वहां अब यह दृश्य आम होता जा रहा है। दरअसल, यह लोग पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) के शिकार हो गए हैं। हादसे में घायल 40 लोग इस समस्या की चपेट में हैं।
डॉक्टर बोले- हादसे में घायल हुए कुछ लोगों काे गहरा सदमा लगा है
अस्पताल के क्लीनिकल साइकोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. यशवंत महापात्र ने बताया कि घायल यात्रियों के मन में डर बैठ गया है। उन्हें गहरा सदमा लगा है। उनको स्वभाविक स्थिति में लौटाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे हादसों में बचने वाले लोगों के दिमाग पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
काउंसलिंग के लिए चार टीमों का गठन किया गया
ऐसे घायलों के मन में गहरे दबे आतंक को निकालने के लिए उनकी काउंसलिंग के लिए चार टीमें गठित की गई हैं। ऐसी हर टीम में एक मनोचिकित्सक और एक मनोवैज्ञानिक के अलावा एक सामाजिक कार्यकर्ता और घायलों के एक या दो परिजनों को शामिल किया गया है।
क्या है PTSD
पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रैस डिसऑर्डर (PTSD) एक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी डिसऑर्डर है, जो किसी ऐसी भयानक घटना की वजह से होता, जिसे व्यक्ति ने खुद अनुभव किया हो। इनमें सड़क या रेल हादसे के अलावा ऊंचाई से गिरना, भीड़ में खो जाना या कहीं फंस जाना, अब्यूज किए जाने जैसी परिस्थिति शामिल है।
घटना के बीत जाने के बाद कई महीनों या सालों तक व्यक्ति उस अनुभव से उबर नहीं पाता है। इसके लक्षणों में फ्लैशबैक, घटना से जुड़े सपने आना, हाई एंग्जाइटी लेवल और लगातार घटना के बारे में सोचना शामिल हैं। इससे सामान्य जीवन मुश्किल हो जाता है। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है।
ओडिशा ट्रेन हादसा, लाशों के बीच पड़ा रहा जिंदा शख्स:लोगों ने मरा समझकर मुर्दाघर में रखा, होश आया तो हाथ हिलाकर बताया- जिंदा हूं
2 जून को शाम 7 बजकर 10 मिनट पर ओडिशा के बालासोर में तीन ट्रेनें एक-दूसरे से टकराईं, जिसमें 288 लोगों की मौत हो गई। एक हजार से ज्यादा घायल हुए। रेस्क्यू के दौरान एक शख्स को मरा समझकर उसके ऊपर लाशों का ढेर लगा दिया गया। लाशों के बीच जब उसने अपना हाथ हिलाया तो लोगों को पता चला कि वह तो जिंदा है।
ओडिशा ट्रेन हादसे में जान गंवाने वालों के शवों को स्कूल के जिस भवन में रखा गया था, उसे अब गिराया जा रहा है। स्कूल प्रशासन का कहना है कि बच्चे और टीचर्स यहां आने से डर रहे थे, इसलिए बिल्डिंग को गिराकर फिर बनाने का निर्णय लिया गया है। स्कूल खुलने से पहले इसका शुद्धिकरण भी कराया जाएगा।