आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ईरान अपनी न्यूक्लीयर फैसिलिटी को इजराइल और अमेरिका के हमले से बचाने की पूरी कोशिश कर रहा है। ऐसे में अब उसने परमाणु हथियार बनाने का काम पहाड़ी इलाके में जमीन के नीचे करना शुरू कर दिया है। इसका खुलासा सैटलाइट तस्वीरों में हुआ है।

एपी की रिपोर्ट के मुताबिक फोटो में ईरान के वर्कर्स जागरोस के पहाड़ों में टनल खोदते दिखाई दे रहे हैं। ये जगह ईरान की न्यूक्लियर साइट नातांज के बिल्कुल करीब है। जो लगातार पश्चिमी देशों के हमले का शिकार होते आ रही है। ये देश नहीं चाहते हैं कि ईरान परमाणु शक्ति हासिल करे।

ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटी का पूरा होना बुरे सपने जैसा

परमाणु फैसिलिटी को बचाने के नए प्रोजेक्ट को एंटी एयरक्राफ्ट बैटरीज, फेंसिंग और ईरान की पैरामिलिट्री के रेवालूशनरी गार्ड प्रोटेक्ट कर रहे हैं। ये टनल 6 मीटर चौड़ी और 8 मीटर लंबी हैं। एपी के मुताबिक ईरान अपनी फैसिलिटी को 80 से 100 मीटर की गहराई में बना रहा है। अंडरग्राउंड फैसिलिटी में अटैक करने के लिए अमेरिका ने GBU-57 बम बनाया था। जो बिना फटे जमीन में 60 मीटर के अंदर जा सकता है। इसका असर 80 से 100 मीटर की गहराई में बनी ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटी पर नहीं होगा।

ईरान का यूरेनियम का उत्पादन परमाणु हथियार बनाने के लेवल तक पहुंचता जा रहा है। इस पर अमेरिका के आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के अधिकारी ने कहा कि ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटी का काम पूरा होना किसी बुरे सपने जैसा होगा।

ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने के सपने को पूरा होने से रोकने के लिए अमेरिका लगातार उस पर पाबंंदियां लगा रहा है। हाल ही में बाईडेन ने ईरान की ऑयल और पैट्रोकैमिकल्स इंडस्ट्री पर पाबंंदियां को और सख्त करने की घोषणा की।

बाइडेन ईरान से न्यूक्लियर डील का वादा पूरा नहीं कर पा रहे

5 साल पहले इसी महीने में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से हुई न्यूक्लियर डील से खुद को बाहर कर लिया था। ये डील ओबामा के कार्यकाल में हुई थी। उस दौरान जो बाइडेन अमेरिका के उप राष्ट्रपति थे। डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता से जाने के बाद बाइडेन ने वादा किया था कि वो ईरान के साथ की गई न्यूक्लियर डील को फिर से शुरू करेंगे। हालांकि, अब तक इसे लेकर की गई बातचीत नाकाम साबित रही हैं।

न्यूक्लियर डील खत्म होने के बाद से ईरान ने यूरेनियम को 60 प्रतिशत कर एनरिच कर लिया है। मामले की जांच करने वाले लोगों के मुताबिक ईरान परमाणु हथियार के लिए अब 83.7 %प्योर यूरेनियम का उत्पादन कर रहा है। हथियार बनाने की कैपिसिटी के लिए 90% प्योर यूरेनियन पार्टिकल्स की जरूरत होती है।