आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सरकारी खजाने (तोशाखाना) के तोहफे बेचने के मामले में मंगलवार को बेल मिली, लेकिन वो अटक जेल से रिहा नहीं हो सके।

इसकी वजह ये है कि उनके खिलाफ सीक्रेट लेटर चोरी (साइफर गेट केस) मामले में वारंट जारी थे, लिहाजा उन्हें ज्यूडिशियल रिमांड पर माना गया। आज इस मामले में खान की पेशी होगी। अगर यहां भी उन्हें जमानत मिली तो भी रिहाई आसान नहीं होगी।

इसकी वजह यह है कि खान के खिलाफ तीन केस ऐसे हैं, जिनमें जांच एजेंसियां उन्हें गिरफ्तार कर सकती हैं। ये हैं- अल-कादिर ट्रस्ट स्कैम, महिला जज को धमकी देने और हलफनामे में बेटी (टायरिन व्हाइट) का नाम छिपाना।

मंगलवार को क्यों रिहा नहीं हो सके इमरान

इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने खान को तोशाखाना केस में बेल दी और तीन साल की सजा पर भी फिलहाल रोक लगा दी। रिहाई के ऑर्डर भी जारी कर दिए। इसके बाद सरकारी वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि खान के खिलाफ दो हफ्ते पहले साइफर गेट केस में वारंट जारी किया गया था। वो इस मामले में ज्यूडिशियल रिमांड पर हैं। बुधवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। इसके बाद ही रिहाई या कैद पर कोई फैसला हो सकता है।

तोशाखाना केस में इमरान की पत्नी बुशरा भी आरोपी हैं। वो अब तक जांच एजेंसियों के सामने पेश होने से बचती रही हैं। कुछ दिन पहले बुशरा को पूछताछ के लिए समन जारी किए गए थे। वो जब पेश नहीं हुईं तो जांच एजेंसियों ने यह समन अखबार में पब्लिश करा दिए थे। पाकिस्तान के टीवी चैनल ‘दुनिया न्यूज’ के मुताबिक- इमरान के बाद बुशरा को भी गिरफ्तार किया जा सकता है।

इमरान पर चार केस ऐसे हैं, जिनमें उनके खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। यही वजह है कि फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) और नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) की टीमें उनका इंतजार कर रही हैं। लिहाजा बुधवार को उन्हें जमानत मिल भी जाती है तो बहुत मुमकिन है कि उन्हें इन दोनों में से कोई जांच एजेंसी जेल के बाहर ही गिरफ्तार कर ले।

90 दिन जांच एजेंसी की कस्टडी में रहेंगे खान

FIA को सीक्रेट लेटर चोरी (साइफर गेट स्कैंडल) और NAB को 9 मई को हुई हिंसा मामले में खान से पूछताछ करनी है। खास बात ये है कि NAB खान को 90 दिन तक पूछताछ के लिए अपनी हिरासत में रख सकती है। इस दौरान उन्हें सुप्रीम कोर्ट समेत कोई अदालत जमानत भी नहीं दे सकेगी। राहत सिर्फ ये रहेगी कि खान को जेल के बजाय जांच एजेंसी के हेडक्वार्टर के कमरे में रखा जाएगा।