आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : तोशाखाना केस में 3 साल की सजा काट रहे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को आज बेल मिलने के पूरे चांसेज हैं। गुरुवार को अगर इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने खान को बेल नहीं दी तो सुप्रीम कोर्ट हमेशा की तरह उन्हें राहत दे सकता है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने इस तरफ इशारा भी कर दिया। उन्होंने कहा- खान को गलत तरीके से सजा दी गई है।
बहरहाल, अगर खान अटक जेल से बाहर भी आते हैं तो भी वो घर नहीं जा सकेंगे। इसकी वजह यह है कि दो जांच एजेंसियां उन्हें गिरफ्तार करने के लिए तैयार हैं। एक मामला सीक्रेट लेटर (साइफर गेट) का है तो दूसरा 9 मई को फौजी ठिकानों पर हमले से जुड़ा है।
हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को खान की बेल पर सुनवाई हुई। तीन जजों की बेंच की अगुआई चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल ने की। बंदियाल हर मामले में इमरान को राहत देते आए हैं। उन्होंने कहा- गुरुवार को इस्लामाबाद हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा। अगर वहां से खान की जमानत खारिज होती है तो हम इस केस को देखेंगे।
खान को जमानत दिए जाने की तरफ इशारा करते हुए बंदियाल ने आगे कहा- शुरुआती तौर पर देखें तो यह साफ नजर आता है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला सही नहीं था। उसमें कई खामियां नजर आती हैं।
गुरुवार को इस्लामाबाद हाईकोर्ट में तोशाखाना केस की सुनवाई चीफ जस्टिस आमेर फारूक करेंगे। खास बात ये है कि इमरान के वकीलों ने उन्हें सुनवाई से हटाने की अपील सुप्रीम कोर्ट से की है। खान के वकीलों ने मंगलवार को दायर पिटीशन में कहा- जस्टिस आमेर इमरान को पसंद नहीं करते। लिहाजा, उनसे ईमानदारी से सुनवाई की उम्मीद नहीं है। उन्हें इस केस से हटाया जाए।
बेल मिलेगी तो भी राहत नहीं मिलेगी
इमरान खान को अगर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को रिहा भी करता है तो बहुत मुमकिन है कि वो घर न जा सकें। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक- खान जब बेल के बाद बाहर आएंगे तो फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) और नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) की टीमें उनका इंतजार कर रही होंगी।
FIA को सीक्रेट लेटर चोरी (साइफर गेट स्कैंडल) और NAB को 9 मई को हुई हिंसा मामले में खान से पूछताछ करनी है। यही वजह है कि खान जैसे ही बाहर आएंगे, ये दोनों एजेंसियां उन्हें अपने साथ ले जा सकती हैं। इस मामले में खास बात ये है कि NAB खान को 90 दिन तक पूछताछ के लिए अपनी हिरासत में रख सकती है। इस दौरान उन्हें सुप्रीम कोर्ट समेत कोई अदालत जमानत भी नहीं दे सकेगी। राहत सिर्फ ये रहेगी कि खान को जेल के बजाए जांच एजेंसी के हेडक्वार्टर के कमरे में रखा जाएगा।
अब तोशाखाना केस को तफ्सील से समझिए
चुनाव आयोग के सामने पिछली सत्ताधारी सरकार पाकिस्तानी डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) ने तोशाखाना गिफ्ट मामला उठाया था। कहा था कि इमरान ने अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न देशों से मिले गिफ्ट को बेच दिया था। इमरान ने चुनाव आयोग को बताया था कि उन्होंने तोशाखाने से इन सभी गिफ्ट्स को 2.15 करोड़ रुपए में खरीदा था, बेचने पर उन्हें 5.8 करोड़ रुपए मिले थे। बाद में खुलासा हुआ कि यह रकम 20 करोड़ से ज्यादा थी।