आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : 5 साल बाद एक बार फिर PM नरेंद्र मोदी दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर जा रहे हैं। मकसद सिर्फ BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेना नहीं, बल्कि अफ्रीका में भारत की पकड़ को मजबूत करना भी है।

दरअसल, दक्षिण अफ्रीका पांचवां ऐसा देश है, जिस पर चीन का सबसे ज्यादा प्रभाव है। ये खुलासा ताइवान की एक एजेंसी डबल थिंक्स लैब्स ने किया है। यही वजह है कि भारत ने अब अफ्रीका में चीन को मात देने की तैयारी कर ली है।

आज की इस स्टोरी में जानेंगे कि आखिर क्यों शी जिनपिंग की वजह से PM मोदी जोहान्सबर्ग गए हैं और अफ्रीका में चीन को टक्कर देने का भारत का मेगा प्लान क्या है?

क्या शी जिनपिंग की वजह से साउथ अफ्रीका जा रहे PM मोदी….

2 अगस्त 2023 को न्यूज एजेंसी रॉयटर्स पर एक खबर छपी। इसमें बताया गया कि PM मोदी ब्रिक्स की मीटिंग के लिए साउथ अफ्रीका नहीं जाएंगे। वो संगठन के इस बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होंगे। एजेंसी ने PM मोदी के इस बैठक में न जाने की वजह BRICS संगठन में चीन का होना और भारत की अमेरिका से बढ़ती नजदीकियों को बताया था।

इसके ठीक 2 दिन बाद यानी 4 अगस्त को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति ने PM मोदी से फोन पर बात की है। वो समिट की बैठक में हिस्सा लेने के लिए साउथ अफ्रीका जाएंगे।

JNU के प्रोफेसर राजन कुमार का कहना है कि चीन उन बड़ी वजहों में से एक है जिसके चलते PM मोदी साउथ अफ्रीका में हो रहे ब्रिक्स समिट में शामिल हो रहे हैं। उनका कहना है कि साउथ अफ्रीका ने समिट के लिए काफी खर्च किया है।

ऐसे में अगर PM मोदी वहां नहीं जाते तो इससे वहां भारत को लेकर नाराजगी बढ़ सकती थी। वहीं साउथ अफ्रीका G-20 देशों का सदस्य है। इसकी मेजबानी इस साल भारत के पास है और अगले ही महीने नई दिल्ली में इसका समिट होने वाला है। ऐसे में साउथ अफ्रीका भी नाराजगी जाहिर करते हुए बैठक में अनुपस्थित हो सकता था। इससे भारत की छवि को नुकसान पहुंचता।

भारत और साउथ अफ्रीका के बीच किसी भी विवाद से चीन को ब्रिक्स में अपनी पैठ मजबूत करने का मौका मिलता। वहीं, समिट के दौरान अफ्रीका आउटरीच और ब्रिक्स प्लस डायलॉग किया जाएगा। इसके जरिए भारत दूसरे अफ्रीकी देशों तक अपनी पहुंच को बढ़ा सकता है। वहीं अगर PM मोदी समिट में शामिल नहीं होते तो ब्रिक्स समिट में केवल एक ताकतवर नेता रहते वो हैं शी जिनपिंग। इससे चीन की संगठन पर पकड़ मजबूत होती और भारत कमजोर पड़ जाता।

3 वजहों से अभी ही अफ्रीका में चीन को पछाड़ सकता है भारत …

दूसरे देशों के मुकाबले पिछले 20 सालों में अफ्रीका में सबसे ज्यादा चीन ने निवेश किया है। भारत चीन को टक्कर देते हुए अफ्रीकी देशों को कर्ज देने के मामले में दूसरे नंबर पर है।

1) चीन ने कर्ज देना कम किया- चीन ने पिछले 10 सालों में अफ्रीकी देशों को 134 बिलियन डॉलर, यानी 11 लाख करोड़ रुपए का कर्ज दिया है। वर्ल्ड बैंक की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक अफ्रीकी देशों के बाहरी कर्ज में 43 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साल 2016 में बाहरी देशों से लिए कर्ज का आंकड़ा 40 लाख करोड़ रुपए था, जो 2020 में 58 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।