आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के कब्जे को दो साल बीत चुके हैं। इस दौरान अफगानिस्तान की पूर्व सरकार में काम करने वाले 200 से ज्यादा अधिकारियों की हत्याएं हो चुकी है। यह खुलासा संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी एक रिपोर्ट से हुआ है।

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के अनुसार, सत्ता पर कब्जे के बाद तालिबान के निशाने पर सेना के जवान, पुलिस, खुफिया विभाग से जुड़े और न्यायिक अधिकारी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान लड़ाकों ने पूर्व अधिकारियों और जवानों को पहले हिरासत में लिया।

देश के 34 प्रांतों में अमानवीयता के मामले

कुछ को जेलों में बंद कर प्रताड़ित किया और उसके बाद हिरासत में ही उन्हें मौत के घाट उतार दिया। कई मामले ऐसे भी है, जब हिरासत में लिए गए अधिकारियों को अज्ञात स्थानों पर ले जाकर मार डाला गया। उनके शवों को इधर-उधर फेंक दिया गया। कुछ मामलों में शव परिवार के सदस्यों को भी सौंपे गए। सभी 34 प्रांतों में अमानवीय घटनाएं सामने आई हैं।

800 से ज्यादा मानवाधिकार उल्लंघन के मामले

इनमें सबसे अधिक संख्या काबुल, कंधार और बल्ख प्रांतों में दर्ज की गई। यूएन ने 15 अगस्त 2021 में तालिबान के आने के बाद से जून 2023 के तक पूर्व अफगान सरकारी अधिकारियों और सुरक्षा बलों के खिलाफ 800 से अधिक मानवाधिकार उल्लंघन को रिपोर्ट में शामिल किया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने कहा कि यह ‘पूर्व सरकार और सुरक्षा बलों से जुड़े व्यक्तियों के साथ बुरे सुलूक की एक गंभीर तस्वीर प्रस्तुत करता है।’

यूएन के लोगों को भी हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया

रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने वाले लोगों को भी पकड़ लिया गया। उन लोगों को पाइप से बांधने से लेकर केबल से पिटाई, एक ही जगह कई दिनों तक खड़ा रखने जैसी यातनाएं दी गईं। कुछ लोग तो आज तक लौटे नहीं हैं।

मान्यता की मांग कर रहा तालिबान

अफगानिस्तान लगातार दुनिया से उसे मान्यता देने की मांग करता रहा है। जुलाई के आखिरी हफ्ते में तालिबान के कार्यकारी रक्षा मंत्री मुल्लाह मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने अल-अरेबिया न्यूज चैनल को एक इंटरव्यू दिया था। इस दौरान उन्होंने कहा था- सरकार ने मान्यता हासिल करने के लिए सारी जरूरतों को पूरा किया है।

इसके बावजूद अमेरिका के दबाव में आकर दूसरे देश हमें मान्यता नहीं दे रहे हैं। हम उन देशों से मान्यता की अपील करते हैं जो अमेरिका के दबाव में नहीं हैं। हम चाहते हैं कि दुनिया के ताकतवर इस्लामिक देश हमें सरकार के तौर पर पहचानें।

मुजाहिद ने कहा- अफगानिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बातचीत करने और उनकी चिंताओं को सुनने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि अगर सउदी अरब उन्हें मान्यता देने को तैयार हो जाता है तो वो 58 और मुस्लिम देशों से बातचीत करने की तैयारी कर रहे हैं।