आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ईद पर सलमान खान की मूवी और सितंबर में नए iPhone की रिलीज पिछले कुछ सालों से तय मानी जाती है। 12 सितंबर को iPhone 15 सीरीज लॉन्च के साथ ये सिलसिला जारी रहा। इस बार iPhone 15 भारत में भी असेंबल हो रहा है, इसलिए भारतीय ग्राहकों को कीमत घटने की उम्मीद थी। हालांकि एपल ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
उदाहरण के तौर पर…
भारत में आईफोन 15 की कीमत 79,900 रुपए रखी गई है, जबकि अमेरिका में यही फोन 799 डॉलर (66,426 रुपए) में बिक रहा है।
भारत में आईफोन 15 प्रो की कीमत 1,34,900 रुपए है, जबकि अमेरिका में यही मोबाइल 999 डॉलर (83,048 रुपए) में बिक रहा है।
भारत में आईफोन 15 प्रो मैक्स (1 टीबी) वैरिएंट की कीमत 1,99,900 रुपए है, जबकि यही मोबाइल अमेरिका में 51% सस्ता यानी 1,32,717 रुपए का बिक रहा है।
भास्कर एक्सप्लेनर में जानेंगे कि भारत में असेंबल होने के बावजूद आईफोन 15 की कीमतें अमेरिका और दुबई जैसे देशों के मुकाबले महंगी क्यों हैं, मोबाइल मैनुफैक्चरिंग में चीन के मुकाबले अभी हम कहां खड़े हैं…
भारत में बनने के बावजूद आईफोन 15 यहां महंगा क्यों बिकता है?
आगे बढ़ने से पहले दो बातें समझनी जरूरी हैं। पहली- भारत में आईफोन 15 मैनुफैक्चर नहीं होता, सिर्फ असेंबल किया जाता है। आईफोन 15 के अलावा आईफोन 15 प्रो सीरीज की कोई डिवाइस भारत में असेंबल भी नहीं होती। ये पूरी तरह डिब्बा बंद होकर भारत में इंपोर्ट की जाती है।
आईफोन 15 प्रो मॉडल्स पूरी तरह तैयार पैक होकर इंपोर्ट किए जाते हैं। सरकार इन पर 22% इंपोर्ट ड्यूटी और 2% सोशल वेलफेयर सरचार्ज लगाती है। इस पर 18% जीएसटी भी लगता है। इस वजह से आईफोन 15 प्रो मॉडल्स पर भारत में कुल टैक्स मिलाकर करीब 40% हो जाता है।
आईफोन 15 का सिस्टम थोड़ा अलग है। इसके अलग-अलग पुर्जे इंपोर्ट किए जाते हैं और फिर इन्हें भारत में असेंबल किया जाता है। ताइवान की फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप ने चेन्नई के पास श्रीपेरंबदूर में एक प्लांट तैयार किया है, जहां आईफोन 15 असेंबल किया जाता है।
आईफोन 15 में लगने वाले सारे कंपोनेंट्स विदेशों से इंपोर्ट किए जाते हैं, जिस पर कस्टम ड्यूटी लगती है। मसलन- आईफोन का डिस्प्ले सैमसंग बनाती है, जिस पर 20% इंपोर्ट ड्यूटी लगती है। इसके अलावा सर्किट बोर्ड, ट्रांजिस्टर्स, प्रोसेसर्स सभी पर इंपोर्ट ड्यूटी और उसके बाद 18% जीएसटी लगता है। ये सब मिलाकर फाइनल प्रोडक्ट की कीमत ज्यादा हो जाती है।