आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) यानी वो टैक्स, जो आपकी किसी भी इनकम से काटा जाता है। बहुत सारे टैक्स पेयर्स सैलरी या इन्वेस्टमेंट से होने वाली इनकम पर TDS से परेशान रहते हैं। इससे बचने के लिए आप इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से रिफंड के लिए फॉर्म भर सकते हैं। इसके अलावा कई और उपाय हैं जिनके जरिए आप टैक्स डिडक्शन से बच सकते हैं।

TDS कब काटा जाता है? कुछ तय सोर्सेस से होने वाली इनकम पर एक लिमिट (थ्रेसहोल्ड लिमिट) के बाद टैक्स काटा जाता है। TDS इस बात पर निर्भर करता है कि टैक्सपेयर किस ब्रैकेट में आता है। इसके अलावा इनकम के अलग-अलग टाइप पर TDS भी अलग होता है। उदाहरण के लिए डिविडेंड यानी किसी शेयर कंपनी के प्रॉफिट में आपका शेयर अगर 5,000 रुपए से ज्यादा हो जाता है तो इस पर डिपार्टमेंट TDS काट लेगा।

वहीं अगर आप किसी बैंक की सेविंग अकाउंट, FD या किसी दूसरे स्कीम से पैसा कमाते हैं तो भी आपको टैक्स देना पड़ेगा। हालांकि इसकी एक लिमिट है। यह लिमिट आम नागरिकों के लिए 40 हजार रुपए है, जबकि सीनियर सिटीजन के लिए 50 हजार रुपए है। इन सोर्सेस से अगर आपकी इनकम इस दी गई लिमिट के उपर जाता है, तो आपकी आय टैक्सेबल हो जाती है।